Lunch Break Accident Recognized: दिल्ली HC ने मुआवजे का आदेश दिया

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें लंच ब्रेक के दौरान कार्यस्थल पर हुई दुर्घटनाओं को भी नौकरी से संबंधित माना जाएगा। न्यायालय
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें लंच ब्रेक के दौरान कार्यस्थल पर हुई दुर्घटनाओं को भी नौकरी से संबंधित माना जाएगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी लंच ब्रेक के दौरान कार्यस्थल पर दुर्घटना का शिकार होता है, तो इसे नौकरी के दौरान हुई दुर्घटना के रूप में देखा जाएगा और ऐसे कर्मचारी को मुआवजे का हकदार माना जाएगा। इस निर्णय ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम की व्याख्या को स्पष्ट किया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भोजन के लिए लिया गया अस्थायी विराम कर्मचारी और उसके रोजगार के बीच संबंध को समाप्त नहीं करता है।
इस मामले में न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने एक कर्मचारी को दिए गए 7.86 लाख रुपये के मुआवजे को चुनौती दी थी। यह मामला वर्ष 2010 का है, जब एक निर्माण स्थल पर सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत कर्मचारी लंच ब्रेक के दौरान एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हुआ। एक मोबाइल क्रेन से गिरने वाली लोहे की राड ने उसके बाएं पैर को काट दिया। इस घटना के बाद कर्मचारी मुआवजा आयुक्त ने उसे मुआवजा देने का आदेश दिया था, जिसे बीमा कंपनी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
















