Islamic NATO announced in Mecca: सऊदी के बाद तुर्की को मिलेगा पाकिस्तान का परमाणु कवच

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने एक नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता सऊदी अरब के
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने एक नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन और सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच किया गया। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस महत्वपूर्ण डील के दौरान गवाह के रूप में उपस्थित थे।
बीबीसी अरबी के अनुसार, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले वर्ष इस तरह का एक समझौता किया था, जिसमें अब तुर्की को भी शामिल किया गया है। इस गठजोड़ को कई रक्षा विशेषज्ञ इस्लामिक नाटो के रूप में संदर्भित कर रहे हैं। समझौते के बाद, तीनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें इस्लामिक एकता बनाए रखने के उद्देश्य से इस समझौते की आवश्यकता को बताया गया है।
इस समझौते के तहत, यदि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके साथ ही, तुर्की को भी अब परमाणु सुरक्षा का कवच मिल गया है। तीनों देश भविष्य में अन्य देशों को भी इस गठबंधन में शामिल करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
पाकिस्तान इस गठबंधन का केंद्र है, क्योंकि यह एकमात्र मुस्लिम देश है, जिसके पास वर्तमान में परमाणु हथियार हैं। सऊदी अरब का रक्षा बजट 60 अरब डॉलर है, जबकि इसके दुश्मनों में ईरान, यमन और यूएई शामिल हैं। तुर्की के दुश्मनों में ग्रीस, साइप्रस और इजराइल हैं, जबकि पाकिस्तान भारत और अफगानिस्तान को अपना दुश्मन मानता है।
















