Panchayat Restructuring in Supaul: आबादी के आधार पर होगा पंचायतों का बंटवारा, पुराने चुनावी समीकरणों के टूटने के आसार

सुपौल के त्रिवेणीगंज से संवाद सूत्र के अनुसार, पंचायती राज विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई अधिसूचना के बाद पंचायतों के भौगोलिक स्वरूप, सीमाएं और चुनावी समीकर
सुपौल के त्रिवेणीगंज से संवाद सूत्र के अनुसार, पंचायती राज विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई अधिसूचना के बाद पंचायतों के भौगोलिक स्वरूप, सीमाएं और चुनावी समीकरण में बदलाव की संभावना बढ़ गई है। यह परिसीमन, जो कि लगातार बढ़ती आबादी और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, पंचायत व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने की दिशा में एक कदम है। चर्चा है कि जिन पंचायतों की आबादी छह हजार से आठ हजार के बीच होगी, उनका परिसीमन नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, लगभग सात हजार की आबादी पर एक पंचायत बनाए जाने की संभावना है। वहीं, 12 हजार से 17 हजार की आबादी वाली पंचायतों को दो हिस्सों में और 18 हजार या उससे अधिक आबादी वाली पंचायतों को तीन हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है। यदि इसी संभावित फार्मूले के आधार पर परिसीमन किया गया, तो जदिया पंचायत, बघेली, महेशुआ और पिलुवाहा जैसी बड़ी आबादी वाली पंचायतों का नक्शा बदल सकता है।
पंचायती राज विभाग की अधिसूचना के बाद, संभावित नई पंचायतों की सीमाएं, नामकरण और वार्डों के पुनर्गठन को लेकर आम लोगों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। गांवों की चौपालों से लेकर बाजारों तक लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि कौन-सा गांव किस पंचायत में रहेगा और किन पंचायतों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। इस समय सभी की निगाहें पंचायती राज विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। बड़ी आबादी वाली पंचायतों और वार्डों का पुनर्गठन लगभग तय माना जा रहा है। नई पंचायतों का नाम उस क्षेत्र की सर्वाधिक आबादी वाले गांव के नाम पर रखे जाने की संभावना है।
परिसीमन का प्रभाव केवल पंचायतों की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर पंचायत चुनाव पर भी पड़ेगा। नई पंचायतों के गठन अथवा वार्डों के पुनर्गठन की स्थिति में मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, वार्ड पंच और जिला परिषद सदस्य के पदों की संख्या में भी बदलाव संभव है। हालांकि, पदों की अंतिम संख्या परिसीमन के प्रारूप, प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण और अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। संभावित बदलावों की आहट मिलते ही पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशी भी सक्रिय हो गए हैं। कई दावेदार अपने-अपने संभावित क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने और लोगों से संपर्क मजबूत करने में जुट गए हैं। उनका मानना है कि यदि परिसीमन उनकी संभावनाओं के अनुरूप रहा तो चुनावी मैदान में वे मजबूती से अपनी दावेदारी पेश करेंगे। इस परिसीमन के बाद कई पुराने चुनावी समीकरण टूट सकते हैं, जबकि नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी उभर सकते हैं।


















