Tiger Conservation Efforts: पटना जू में बाघों की दहाड़, देशभर के चिड़ियाघरों में गूंज रही है आवाज़

पटना जू, जो जैव विविधता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहाँ के बाघों की कहानियाँ न केवल पर्यटकों को आकर्
पटना जू, जो जैव विविधता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहाँ के बाघों की कहानियाँ न केवल पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, बल्कि यह बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने में भी सहायक हैं। हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। पटना जू ने अन्य चिड़ियाघरों को 12 बाघ देकर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में, पटना जू के बाघों की दहाड़ रांची, राजगीर, कोलकाता, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे चिड़ियाघरों में सुनाई दे रही है। रांची जू को पांच बाघ, राजगीर जू सफारी को चार, कोलकाता जू को एक, बेंगलुरु जू को एक और दिल्ली जू को एक बाघ दिया गया है। इसके अलावा, पटना जू में नई ब्लडलाइन के तहत कई बाघ लाए गए हैं, जिसमें दिल्ली, असम, नंदनकानन, हैदराबाद, तिरुपति और बेंगलुरु के चिड़ियाघरों से बाघ शामिल हैं। यह अदला-बदली बाघों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने और जैव विविधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
बाघों का संरक्षण केवल एक प्रजाति की रक्षा करने का कार्य नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण है। बाघों की कमी से अन्य प्रजातियों का अस्तित्व भी प्रभावित होता है। पटना जू में बाघों की संख्या को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। ऑल इंडिया टाइगर ऐस्टीमेशन 2022 के अनुसार, वाल्मीकि ब्याघ्र आरक्ष में 54 बाघ पाए गए हैं, जो 2018 में पाए गए 31 बाघों की तुलना में काफी अधिक है। पटना जू में वर्तमान में 53 बाघ हैं, जिन्हें संरक्षण, प्रजनन और पर्यटकों के प्रदर्शन के लिए रखा गया है। 12 अगस्त 2011 को हैदराबाद और तिरुपति जू से लाए गए बाघों ने पटना जू में सफेद बाघों की संख्या को भी बढ़ाया है। इन बाघों में से आठ सफेद शावक पैदा हुए हैं, जो जू की विशेषता को और बढ़ाते हैं।



















