Political Tensions in Parliament: संसद में गूंजा पुलिस कार्रवाई का मुद्दा, राज्यसभा में खरगे और नड्डा के बीच तीखी नोकझोंक

नई दिल्ली में बुधवार को राज्यसभा में पुलिस कार्रवाई का मुद्दा गरमा गया, जब सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने पार्टी के दफ्तर में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा
नई दिल्ली में बुधवार को राज्यसभा में पुलिस कार्रवाई का मुद्दा गरमा गया, जब सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने पार्टी के दफ्तर में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई लोकतंत्र के लिए खतरा है और गृह मंत्री से जवाब मांगने की बात कही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि देश में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय पार्टी के दफ्तर में सीबीआई की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र पर खतरा मंडरा रहा है। खरगे ने कहा कि किसी भी पार्टी के दफ्तर में घुसकर लोगों को गिरफ्तार करना अस्वीकार्य है। इस पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पुलिस ने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की थी। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी स्थिति इससे बदतर थी। इस दौरान सदन में हंगामा हुआ और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
राज्यसभा में इस मुद्दे पर बहस तब तेज हुई जब जॉन ब्रिटास ने कहा कि पुलिस कैसे किसी पार्टी के दफ्तर में जाकर गिरफ्तारियां कर सकती है। उन्होंने गृह मंत्री से इस कार्रवाई का स्पष्टीकरण मांगा। खरगे ने ब्रिटास का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक गंभीर मामला है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि सरकार लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। खरगे ने कहा कि अगर पुलिस और एजेंसियां इस तरह से काम करेंगी, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरा बनेगा। इस पर नड्डा ने जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और वास्तविकता को छिपा रहा है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भी कई बार गिरफ्तार हुए हैं और यह कोई नई बात नहीं है।

















