Raids on Engineer's Properties: मुजफ्फरपुर में आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्यपालक अभियंता के छह ठिकानों पर ईओयू की छापेमारी

मुजफ्फरपुर में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज किया है। इस बार लघु सिंचाई प्रमंडल, सासाराम के कार्यपालक अभियंता
मुजफ्फरपुर में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज किया है। इस बार लघु सिंचाई प्रमंडल, सासाराम के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार चौधरी को निशाना बनाया गया है। ईओयू की विशेष टीमों ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में पटना, मुजफ्फरपुर, सासाराम, डेहरी और बांका में कुल छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, कार्यपालक अभियंता के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद प्राथमिक सत्यापन के बाद कांड संख्या 15/26 दर्ज की गई। जांच में यह पाया गया कि चौधरी ने अपनी वैध आय के स्रोतों से लगभग 1 करोड़ 19 लाख 98 हजार 534 रुपये अधिक की संपत्ति जमा की है, जो उनकी वास्तविक आय से लगभग 85.05 प्रतिशत अधिक है। कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद, ईओयू की टीम ने बुधवार की सुबह सभी ठिकानों पर धावा बोल दिया।
छापेमारी के दौरान ईओयू की अलग-अलग टीमें अरविंद कुमार चौधरी के साम्राज्य की जांच में जुटी हैं। छापेमारी की जद में पटना के आदमपुर स्थित वीनस पैराडाइज अपार्टमेंट और आशोपुर स्थित वीनस इम्पायर का फ्लैट, मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र के दामूचक महामाया स्थान स्थित ससुराल, सासाराम स्थित कार्यालय और डेहरी स्थित सरकारी आवास शामिल हैं। इसके अलावा, टीम ने बांका के पीपराडीह स्थित उनके पैतृक आवास की भी जांच की। जांच अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनमें जमीनों के डीड, आलीशान फ्लैटों के दस्तावेज, कई बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट और निवेश से जुड़े कागजात शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।
ईओयू के अधिकारियों का कहना है कि पूरी तलाशी और मूल्यांकन की प्रक्रिया के बाद ही इस काली कमाई के बड़े खेल का खुलासा किया जाएगा। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ईओयू की मुहिम लगातार जारी है। कार्यपालक अभियंता के खिलाफ की गई यह छापेमारी न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश है, बल्कि यह सरकारी अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन करें। ईओयू की इस कार्रवाई से यह भी संकेत मिलता है कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।















