Relations with Pakistan and China: हमें पहले से मौजूद संबंध तोड़ना नहीं चाहिए, संघ प्रमुख भागवत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में युवा पीढ़ी, जिसे जनरेशन जेड के नाम से जाना जाता है, के आंदोलन और भ
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में युवा पीढ़ी, जिसे जनरेशन जेड के नाम से जाना जाता है, के आंदोलन और भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ पहले से मौजूद संबंधों को तोड़ने की आवश्यकता नहीं है। भागवत का मानना है कि ये संबंध ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें संघर्ष के समय में भी बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश की सरकार और सेना के साथ खड़ा रहना चाहिए, विशेषकर जब आतंकवाद जैसी घटनाएं होती हैं। उनका यह भी कहना था कि स्थायी शत्रुता और घृणा किसी समस्या का समाधान नहीं है।
भागवत ने भारत और चीन के संबंधों को कई सदियों पुराना बताया और कहा कि पाकिस्तान कभी भारत का हिस्सा था। उनके अनुसार, इन संबंधों को भुलाया नहीं जा सकता और इन्हें संघर्ष की स्थिति में स्थगित किया जा सकता है, लेकिन तोड़ा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का उद्देश्य दूसरों पर विजय प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक सामंजस्यपूर्ण और आत्मसात करने वाली प्रक्रिया का निर्माण करना है। संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि संघर्ष इन संबंधों को रोक सकते हैं, लेकिन उन्हें तोड़ना नहीं चाहिए।















