RSS exhibits extreme casteism: भागवत की हिन्दू एकता हवाहवाई
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में हिन्दू एकता के विषय में बयान दिया, जिसे सुनकर एक बार फिर पुरानी कहावत 'थोथा चना, बाजे घना' य
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में हिन्दू एकता के विषय में बयान दिया, जिसे सुनकर एक बार फिर पुरानी कहावत 'थोथा चना, बाजे घना' याद आ गई। आरएसएस के पदाधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि हमारे समाज का एक बड़ा वर्ग इस संगठन को एक नैतिक स्रोत मानता है, जबकि वास्तव में, यह संगठन अपने भीतर गहरे सतहीपन को छिपाए हुए है। आरएसएस के प्रमुख की छवि एक ऐसे विचारक की बनाई जाती है जो धर्म, राजनीति और शिक्षा के सभी पहलुओं में ज्ञानी है। लेकिन सच्चाई यह है कि आरएसएस के प्रचारक केवल सतही ज्ञान के आचार्य होते हैं।
आरएसएस का दावा है कि वह हिंदू समाज को जागरूक करने का कार्य कर रहा है और उसके चरित्र निर्माण में संलग्न है। लेकिन क्या वास्तव में वह ऐसा कर रहा है? हिंदू समाज एक अत्यधिक विभाजित और स्तरीकृत समाज है, जिसमें जाति ही जीवन का प्रमुख निर्धारक है। आज भी मंदिरों में दलितों का प्रवेश मुश्किल है, और उन्हें केवल दक्षिणा के स्रोत के रूप में देखा जाता है। उच्च जातियों के लोग दलितों को अपनी नजरों से ओझल करने का प्रयास करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जाति के आधार पर भेदभाव अभी भी व्यापक है।
















