Drone and Robot Collaboration: IIT मंडी के शोधार्थियों ने तैयार किया भविष्य का रक्षक

हंसराज सैनी, मंडी। प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप या भूस्खलन के दौरान, या फिर गहरी खदानों और केमिकल प्लांट में जहरीली गैस के रिसाव जैसी स्थितियों में इंसान को भेजे
हंसराज सैनी, मंडी। प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप या भूस्खलन के दौरान, या फिर गहरी खदानों और केमिकल प्लांट में जहरीली गैस के रिसाव जैसी स्थितियों में इंसान को भेजे बिना सही जानकारी प्राप्त करना हमेशा एक चुनौती रहा है। लेकिन अब आइआइटी मंडी के शोधकर्ताओं ने इस समस्या का समाधान खोज निकाला है। उन्होंने एक ड्रोन और चार पैरों वाले (क्वाड्रापेडल) रोबोट का ऐसा संयोजन विकसित किया है, जो किसी भी दुर्गम और खतरनाक क्षेत्र को मिनटों में पार कर सकता है। इस तकनीक में ड्रोन आंखों का काम करेगा, जबकि रोबोट कदमों का। यह संयोजन खतरनाक खदानों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी करने में मदद करेगा, जिससे जान-माल का जोखिम कम होगा। इस प्रकार, मौत का डर और भटकने की चिंता समाप्त हो जाएगी।
जमीन पर चलने वाले रोबोट्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनकी सीमित देखने की क्षमता होती है। जब सामने कोई ऊंची दीवार, बड़ा पत्थर या खाई आती है, तो वे अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। आइआइटी मंडी की इस नई तकनीक में ड्रोन, रोबोट की आंखों के रूप में कार्य करता है। ड्रोन में लगे हाईटेक आरजीबी-डी कैमरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह हवा से पूरे इलाके का 3डी मैप तैयार कर लेता है। यह रास्ते में मौजूद बाधाओं जैसे पत्थरों, सीढ़ियों, दलदल या रेत की पहचान कर तुरंत जमीन पर चल रहे रोबोट को रियल-टाइम निर्देश भेजता है। निर्देश मिलने के बाद, रोबोट बिना रुके अपनी चाल और रास्ता खुद बदल लेता है।



















