Supreme Court Case: 10 साल पुरानी डीजल कार को नहीं मिला PUC सर्टिफिकेट

दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए बैन के बावजूद, एक लग्जरी वॉल्वो कार के मालिक को puc सर्टि
दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए बैन के बावजूद, एक लग्जरी वॉल्वो कार के मालिक को PUC सर्टिफिकेट प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कार मालिक ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी एमिशन टेस्ट में पास होने के बावजूद PUC सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या का मुख्य कारण अधिकारियों द्वारा सॉफ्टवेयर में बैन होना बताया गया है, जिससे उन्हें ईंधन प्राप्त करने में भी कठिनाई हो रही है। कोर्ट ने 17 दिसंबर को स्पष्ट किया था कि सिर्फ उम्र के आधार पर इन गाड़ियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन इसके बावजूद कार मालिक को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
सीनियर वकील राकेश खन्ना ने CJI सूर्यकांत की बेंच के समक्ष यह मामला प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वोल्वो XC-60 जैसी महंगी गाड़ियों की उम्र लंबी होती है और इन गाड़ियों को स्क्रैप करने पर मालिकों को भारी खर्च उठाना पड़ सकता है। खन्ना ने यह भी कहा कि PUCC सेंटर्स के सॉफ्टवेयर सिस्टम और उनके काम करने के निर्देश ऐसी गाड़ियों को PUC सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति नहीं देते हैं जो निर्धारित उम्र सीमा पार कर चुकी हैं, भले ही गाड़ी एमिशन टेस्ट पास कर ले। इस स्थिति के कारण कार मालिक अपनी गाड़ी के लिए ईंधन नहीं खरीद पा रहे हैं, जिससे उनकी गाड़ी चल नहीं पा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की है। पिछले साल 25 जुलाई को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि केंद्र सरकार या एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन को निर्देश दिया जाए कि वे NCR में 15 साल या उससे अधिक पुरानी पेट्रोल और 10 साल या उससे अधिक पुरानी डीजल गाड़ियों के चलने पर पूरी तरह से लगी रोक को जारी रखने की आवश्यकता पर एक व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन करें। यह रोक सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2018 को अपने आदेश से लगाई थी। 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने संशोधित आदेशों में स्पष्ट किया था कि बीएस-IV और उससे नए उत्सर्जन मानकों वाले 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
















