Tiger found dead in Amangarh: बूढ़ी बाघिन की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई

बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बूढ़ी बाघिन की मौत का मामला सामने आया है। यह बाघिन गुर्जर गेट के पास बेहद कमजोर अवस्था में मिली थी। वन विभाग की टीम ने जब
बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बूढ़ी बाघिन की मौत का मामला सामने आया है। यह बाघिन गुर्जर गेट के पास बेहद कमजोर अवस्था में मिली थी। वन विभाग की टीम ने जब उसे देखा, तो उसका वजन एक कुंतल से भी कम था, जो कि सामान्य बाघों के वजन के मुकाबले बहुत कम है। बाघिन को खाने के लिए मुर्गा दिया गया, लेकिन उसने उसे नहीं खाया। इसके बाद उसे कानपुर चिड़ियाघर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बाघिन की आयु लगभग 15 वर्ष थी, जो बाघों के लिए एक अच्छी उम्र मानी जाती है। हालांकि, उसकी स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट था कि वह काफी समय से शिकार नहीं कर पाई थी। पोस्टमार्टम के दौरान यह पाया गया कि उसका पेट पूरी तरह से खाली था। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघिन की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है।
शनिवार को वन विभाग की टीम को अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में गुर्जर गेट के पास एक बाघिन मिली थी। बाघिन की हालत इतनी खराब थी कि वह खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। आमतौर पर बाघों का वजन डेढ़ से ढाई कुंतल तक होता है, लेकिन इस बाघिन का वजन एक कुंतल से भी कम था। टीम ने बिना ट्रैंकुलाइज किए ही बाघिन को पिंजरे में रख लिया। उसे खाने के लिए मुर्गा दिया गया, लेकिन उसने उसे नहीं खाया, जबकि पानी पीने की स्थिति में थी। बाघिन को कानपुर चिड़ियाघर भेजने का निर्णय लिया गया, लेकिन वह चिड़ियाघर से 40 किलोमीटर पहले ही दम तोड़ चुकी थी।
बाघिन के शव का पोस्टमार्टम कानपुर में किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि बाघिन का पेट पूरी तरह से खाली था और उसके शरीर पर संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले। डीएफओ जय सिंह कुशवाहा ने बताया कि बाघिन की मौत एकदम प्राकृतिक थी। उन्होंने कहा कि बाघिन की उम्र के कारण वह शिकार नहीं कर पा रही थी, जिससे उसकी स्थिति और भी खराब हो गई थी। इस घटना ने वन विभाग के कर्मचारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कैसे बाघों की सुरक्षा और उनके शिकार की स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।
















