Unique Protest in Jharkhand: झारखंड में छात्राओं का यूनिक प्रोटेस्ट, रांची की सड़कों पर गूंजे नारे

झारखंड की राजधानी रांची में छात्राओं और नौकरी के अभ्यर्थियों का एक अनोखा प्रदर्शन चल रहा है, जो अपने विशेष अंदाज के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया
झारखंड की राजधानी रांची में छात्राओं और नौकरी के अभ्यर्थियों का एक अनोखा प्रदर्शन चल रहा है, जो अपने विशेष अंदाज के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस प्रदर्शन में शामिल छात्राएं और छात्र ऐसे पोस्टर लेकर आए हैं, जिन पर लिखा है, 'नो जॉब, नो शादी।' यह नारा बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों में देरी के मुद्दे को सीधे युवाओं की निजी जिंदगी से जोड़ता है। यह संदेश उन हजारों युवाओं की नाराजगी को दर्शाता है, जो वर्षों से राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इन पोस्टरों के माध्यम से वे यह स्पष्ट कर रहे हैं कि जब तक वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बनते, तब तक वे न तो अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं और न ही समाज का सामना कर सकते हैं। इस प्रकार का संदेश तेजी से फैल रहा है और सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा हो रही है।
रांची का यह प्रदर्शन मुख्य रूप से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और बापू वाटिका के आसपास केंद्रित है। यहां जुटे नौकरी के अभ्यर्थी झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, कटऑफ स्कोर की अनुपलब्धता और मूल्यांकन में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र सीबीआई जांच की जाए। इस आंदोलन की एक विशेषता यह है कि इसमें एक सख्त आचार संहिता का पालन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक, धार्मिक या 'आजादी' जैसे नारों से दूर रह रहे हैं। कई वायरल वीडियो में छात्र आयोजकों को बाहरी समूहों को रोकते हुए देखा जा सकता है, जिसमें वे कहते हैं, 'यह रांची है, जंतर मंतर नहीं। यह ऑर्गेनिक स्टूडेंट प्रोटेस्ट है।' इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्र इस आंदोलन की दिशा को अपने हाथ में रखना चाहते हैं।
तेज बारिश, मजबूत हवा और बुनियादी ढांचे की कमी के बावजूद सैकड़ों छात्र अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। इस बीच, सरकार ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। कुल मिलाकर, रांची का यह प्रदर्शन अपनी अनुशासित शैली, रचनात्मक पोस्टरों और भर्ती प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों के कारण एक अलग पहचान बना चुका है। यह आंदोलन न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी युवाओं की आवाज को मजबूती से प्रस्तुत कर रहा है।
















