Ranchi Protest: अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत, ICU में एक भर्ती; 24 घंटे डॉक्टर तैनात करने की मांग

रांची में जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्रों के आंदोलन के बीच अनशन पर बैठे छात्रों की बिगड़ती सेहत एक ग
रांची में जेपीएससी, जेएसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्रों के आंदोलन के बीच अनशन पर बैठे छात्रों की बिगड़ती सेहत एक गंभीर मुद्दा बन गई है। हाल ही में, पलामू निवासी राहुल की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया है। राहुल की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने पर प्रशासन भी सक्रिय हुआ और एसडीओ तथा एसडीएम सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने चिकित्सकों से राहुल के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। छात्रों ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से अनशन पर बैठे छात्रों की सेहत लगातार गिर रही है, लेकिन धरनास्थल पर पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं है। छात्रों ने मांग की है कि धरनास्थल पर 24 घंटे डॉक्टर और मेडिकल टीम की तैनाती की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। उनका कहना है कि स्वास्थ्य की अनदेखी से किसी भी समय गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
वर्तमान में तीन छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं और आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक पहल नहीं करती, तब तक अनशन और आंदोलन जारी रहेगा। राहुल के अस्पताल पहुंचने के बाद अन्य अनशनकारियों की स्वास्थ्य जांच भी तेज कर दी गई है। आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों का कहना है कि प्रशासन को केवल अस्पताल में इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरनास्थल पर भी निरंतर चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समुचित चिकित्सा व्यवस्था नहीं की गई तो अन्य अनशनकारियों की तबीयत भी गंभीर रूप से बिगड़ सकती है। छात्रों की चिंताएं बढ़ गई हैं, खासकर राहुल के आईसीयू में भर्ती होने के बाद। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और आंदोलन को लेकर सरकार के रुख पर टिकी हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे और किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलनकारियों का यह भी कहना है कि उनकी आवाज को सुनने की आवश्यकता है और सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
















