Political Parties in Uttarakhand: 17 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को पंजीकरण से हटाने की प्रक्रिया

उत्तराखंड में राजनीतिक दलों की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में 17 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पंजीकृत दल
उत्तराखंड में राजनीतिक दलों की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, राज्य में 17 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पंजीकृत दलों की सूची से हटाने की तैयारी की जा रही है। यह कार्रवाई आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले की जा सकती है, जो कि राज्य की राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) उत्तराखंड के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, जिन दलों को हटाने की प्रक्रिया में शामिल किया गया है, उन्होंने 2019 के बाद से कोई भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। यह स्थिति उन दलों के लिए चिंताजनक हो सकती है, जो राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं रहे हैं।
इन 17 दलों में हरिद्वार की भारत कौमी दल, हरिद्वार की भारत परिवार पार्टी, हरिद्वार की भारतीय सम्राट सुभाष सेना, हरिद्वार की पीपुल्स पार्टी, देहरादून की भारतीय मूल निवासी समाज पार्टी, देहरादून की भारतीय अंत्योदय पार्टी, देहरादून की भारतीय ग्राम नगर विकास पार्टी, देहरादून की गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट, नैनीताल की प्रजातंत्र पार्टी ऑफ इंडिया, हल्द्वानी की सूरज सेवा दल और देहरादून की उत्तराखंड जनशक्ति पार्टी शामिल हैं। इसके अलावा, चुनाव आयोग ने पहले भी छह अन्य दलों जैसे देहरादून के भारतीय जनक्रांती पार्टी, देहरादून की भारतीय जनमंच पार्टी, देहरादून की मैदानी क्रांति पार्टी, पौड़ी गढ़वाल की प्रजामंडल पार्टी, हरिद्वार की राष्ट्रीय ग्राम विकास पार्टी और देहरादून की राष्ट्रीय जनसहाय पार्टी को भी हटाया था।
उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और ऐसे में यदि चुनाव आयोग इन दलों को हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। राजनीतिक दलों की मान्यता और उनकी सक्रियता चुनावी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस निर्णय का क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या इससे अन्य दलों को भी अपनी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
















