Voter ID Fraud Exposed: दिल्ली से यूपी-बिहार तक फर्जीवाड़े का खुलासा, चुनाव आयोग की कार्रवाई

दिल्ली की प्रवासी आबादी, सरकारी कर्मचारियों के नियमित तबादले और बिना पंजीकरण लोगों द्वारा मकान बदलने की समस्या ने चुनाव आयोग के एसआइआर अभियान को चुनौती दी है। इ
दिल्ली की प्रवासी आबादी, सरकारी कर्मचारियों के नियमित तबादले और बिना पंजीकरण लोगों द्वारा मकान बदलने की समस्या ने चुनाव आयोग के एसआइआर अभियान को चुनौती दी है। इस बदलाव के कारण कई मतदाता एसआइआर फार्म से वंचित रह गए हैं और उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थानीय बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) का कहना है कि वे मतदाता सूची में दिए गए पते पर दो से तीन बार दौरा कर रहे हैं। इसके अलावा, स्थानीय लोगों से पूछताछ और राजनीतिक दलों के बीएलए से भी बात करके ऐसे मतदाताओं की पहचान की जा रही है। नाम हटाने की रिपोर्ट एसडीएम और निर्वाचक पंजीकरण को भेजी जा रही है, और अंतिम निर्णय एसडीएम या निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी द्वारा लिया जाएगा। बूथ लेवल अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में उन मतदाताओं की पहचान की जा रही है जो अपने पंजीकृत पते पर अब नहीं रहते हैं। कई मामलों में, लोग दिल्ली छोड़कर नहीं गए हैं, बल्कि शहर के किसी अन्य इलाके में चले गए हैं।
इसके अलावा, एम्स जैसे आवासीय परिसरों और हास्टलों में डॉक्टरों और छात्रों के कोर्स पूरा होने से भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जांच में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां लोगों के पास दो-दो वोटर आईडी हैं और उनका नाम दिल्ली के साथ-साथ उनके पैतृक राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड की वोटर लिस्ट में भी दर्ज है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी मतदाता को स्थानांतरित या लापता घोषित करने से पहले बीएलओ को पूरी जांच करनी होती है। बीएलओ का मुख्य कार्य मतदाता का डेटा जमा करना है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
















