Changing Behavior of Tigers: पीलीभीत के बाघों का मानव के साथ सह-अस्तित्व

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के व्यवहार में हाल के समय में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहले जहां बाघ मानवों को देखकर छिपने की कोशिश करते थे, वहीं अ
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के व्यवहार में हाल के समय में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पहले जहां बाघ मानवों को देखकर छिपने की कोशिश करते थे, वहीं अब वे मानवों के साथ सह-अस्तित्व स्वीकारने लगे हैं। पर्यटन सत्र के दौरान, बाघ सफारी वाहनों के सामने बेफिक्र होकर विचरण करते हैं और कैमरों के सामने टिककर भंगिमाएं बदलते हैं। पिछले सत्र में ऐसे कई फोटो सामने आए हैं, जिनमें बाघ पर्यटकों के सामने बिना किसी झिझक के खड़े रहे। यह बदलाव वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 730 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें बफर जोन 128 किलोमीटर है। यहां बाघों की संख्या 2014 में 25 थी, जो अब बढ़कर 80 से अधिक हो गई है। यह वृद्धि न केवल बाघ संरक्षण के लिए सकारात्मक है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गई है।
पीटीआर में बाघों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। जंगल में 122 जलाशय और 10 नहरें हैं, जहां बाघ पानी पीने आते हैं। बाघों की सुरक्षा के लिए पहले से कुछ कैमरे लगाए गए थे, लेकिन अब 100 इंफ्रा रेड कैमरे लगाने की योजना है, जिससे 24 घंटे निगरानी की जा सकेगी। खटीमा रोड पर बाघों की सबसे ज्यादा साइटिंग होती है, जहां बाघ अक्सर वाहनों के सामने टहलते नजर आते हैं। इस तरह के व्यवहार ने पर्यटकों को आकर्षित किया है और पीटीआर की लोकप्रियता को बढ़ाया है। हालांकि, बाघों का मानवों के साथ अभ्यस्त होना मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी बढ़ा सकता है, जिससे सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

















