Tiger Population Growth: मुरादाबाद में बाघों की संख्या में वृद्धि

मुरादाबाद के अमानगढ़ के जंगलों में बाघों का परिवार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जंगल के राजा की प्रजाति के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है। वन विभाग के आंकड़ों के अनु
मुरादाबाद के अमानगढ़ के जंगलों में बाघों का परिवार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जंगल के राजा की प्रजाति के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अमानगढ़ का जंगल 9500 हेक्टेयर यानी 95 वर्ग किमी में फैला हुआ है। पिछले चार वर्षों में बाघों की संख्या में वृद्धि के कारण, प्रत्येक बाघ का विचरण क्षेत्र दो किमी घटकर अब आठ वर्ग किमी रह गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाघों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ उनके बीच की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। चार साल पहले जब बाघों की संख्या केवल 32 थी, तब हर बाघ लगभग 10 वर्ग किमी में विचरण करता था। अब, जब उनकी संख्या बढ़कर लगभग 40 होने की उम्मीद है, तो यह स्पष्ट है कि बाघों के बीच क्षेत्र को लेकर संघर्ष भी बढ़ सकता है। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर, यह जानकारी वन्यजीव संरक्षण के लिए एक अच्छी खबर है। हाल ही में वन विभाग ने बाघों की गणना के लिए छह टीमों का गठन किया है, जो कैमरा ट्रैप, पगमार्क, मल और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके बाघों की मौजूदगी का आकलन कर रही हैं। गणना का आधिकारिक आंकड़ा दिसंबर तक जारी किया जाएगा।
बाघों की संख्या में वृद्धि का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को दर्शाता है। मंडलीय वन संरक्षक आदर्श कुमार के अनुसार, बाघों की संख्या में वृद्धि का मतलब है कि अमानगढ़ में शिकार, जल स्रोत और सुरक्षित आवास की उपलब्धता में सुधार हुआ है। बाघों के बीच क्षेत्र को लेकर लड़ाई कभी-कभी इतनी गंभीर हो जाती है कि एक बाघ दूसरे को मार डालता है। नर बाघों के बीच यह प्रतिस्पर्धा अधिकतर विचरण क्षेत्र के लिए होती है, जबकि मादा बाघ अपने बच्चों को दो साल तक अपने पास रखती हैं। इसके बाद, वह उन्हें छोड़ देती है। मादा बाघ का विचरण क्षेत्र तीन किमी का होता है, जो उनके प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण होता है।



















