International Tiger Day: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व बना बाघ संरक्षण का प्रतीक, राजाजी में भी बढ़ रही बाघों की शान

त्रिलोक रावत, रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड का कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) अब बाघों के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है। यहाँ बाघों की संख्या में हर स
त्रिलोक रावत, रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड का कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) अब बाघों के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है। यहाँ बाघों की संख्या में हर साल वृद्धि हो रही है, जो कि प्रकृति, सुरक्षा और संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक संकेत है। कार्बेट टाइगर रिजर्व ने बाघों के संरक्षण के लिए जो प्रयास किए हैं, वे न केवल इस क्षेत्र में बल्कि आस-पास के राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों में भी बाघों की संख्या को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। हाल ही में, यहाँ से पांच बाघ राजाजी के जंगलों में भेजे जाने की योजना बनाई गई है, जिससे बाघों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व ने वर्ष 2010 में रूस से शुरू हुए इंटरनेशनल टाइगर डे के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहाँ बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत के 58 टाइगर रिजर्व में सीटीआर बाघों की संख्या के मामले में सबसे आगे है। वर्ष 2006 में यहाँ 150 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो कि अब बढ़कर 2022 में 260 तक पहुँच गई है। कार्बेट में बाघों का घनत्व भी अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है, यहाँ प्रति सौ वर्ग किलोमीटर में 14 बाघ पाए जाते हैं।



















