Government Tightens Rules on AI-Generated Content: AI से बनाए गए फर्जी ऑडियो-वीडियो पर सरकार सख्त, अब महज 3 घंटे के भीतर हटाने होंगे आपत्तिजनक कंटेंट

केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ai) से बनाए गए डीपफेक और फर्जी ऑडियो-वीडियो तथा टेक्स्ट जैसे आपत्तिजनक कंटेंट से निपटने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के
केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए डीपफेक और फर्जी ऑडियो-वीडियो तथा टेक्स्ट जैसे आपत्तिजनक कंटेंट से निपटने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नियमों को सख्त कर दिया है। फरवरी में आईटी नियमों में किए गए बदलाव के तहत, अब प्लेटफार्मों को एआई से बने ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट रूप से लेबल लगाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उसमें ट्रेसेबल मेटाडेटा हो, ताकि यूजर सिंथेटिक रूप से बनाए गए मटीरियल की पहचान कर सकें।
संशोधित नियमों के अनुसार, प्लेटफार्मों को गैर-कानूनी AI-जनरेटेड कंटेंट, जैसे डीपफेक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा मटीरियल, बिना सहमति के निजी तस्वीरें और AI-आधारित फोटो-वीडियो के खिलाफ कदम उठाने होंगे। इसके अतिरिक्त, प्लेटफार्मों को अब गैर-कानूनी AI-जनरेटेड कंटेंट बनाने या शेयर करने के कानूनी नतीजों के बारे में यूजर्स को भी बताना होगा ताकि वे इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक रहें।
आईटी मंत्रालय ने गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए प्लेटफार्मों को दी जाने वाली समय-सीमा में भी बदलाव किया है। सरकार ने इसे 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दिया है। यह समय-सीमा सरकार या कोर्ट से वैध नोटिस मिलने के बाद शुरू होगी। नियमों में यह भी कहा गया है कि मध्यस्थों को ऐसे उचित और सही तकनीकी उपाय अपनाने होंगे जिनसे यूजर्स गैर-कानूनी सिंथेटिक कंटेंट न बना सकें और न ही उसे शेयर कर सकें।
सरकार ने शिकायतों को सुलझाने के लिए समय-सीमा को भी और सख्त कर दिया है। नए नियमों के अनुसार, न्यूडिटी और किसी अन्य का रूप धरने जैसे संवेदनशील मामलों से जुड़ी शिकायतों का समाधान अब 2 घंटे के भीतर करना होगा, जबकि पहले इसके लिए समय सीमा 24 घंटे की थी। आईटी नियमों का पालन न करने पर प्लेटफार्मों को IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली सेफ-हार्बर सुरक्षा खोनी पड़ सकती है।



















