V2V Explained: फ्यूचर में गाड़ियां करेंगी एक-दूसरे से बात... भारत सरकार का बड़ा प्लान

भारत में वाहन सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सरकार ने एक नई तकनीक को लागू करने की योजना बनाई है, जिसे व्हीकल-टू-व्हीकल (v2v) कम्युनिकेशन कहा जाता है। यह तकनीक गाड़ियो
भारत में वाहन सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सरकार ने एक नई तकनीक को लागू करने की योजना बनाई है, जिसे व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन कहा जाता है। यह तकनीक गाड़ियों को एक-दूसरे से वायरलेस तरीके से संवाद करने की अनुमति देगी, जिससे सड़क पर सुरक्षा में सुधार होगा। भारत उन देशों में शामिल हो सकता है, जहां सभी नए वाहनों में यह प्रणाली अनिवार्य होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को नए वाहनों में शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से गाड़ियां अपनी गति, स्थिति, दिशा और त्वरण की जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा करेंगी, जिससे संभावित दुर्घटनाओं के बारे में पहले से चेतावनी मिल सकेगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई वाहन अचानक ब्रेक लगाता है या गलत लेन में चला जाता है, तो अन्य वाहन चालक को तुरंत अलर्ट किया जाएगा।
इस तकनीक का उद्देश्य मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक प्रभावी बनाना है। वर्तमान में, सुरक्षा प्रणालियाँ कैमरा, रडार और ऑन-बोर्ड सेंसर पर निर्भर करती हैं, जबकि V2V कम्युनिकेशन सिस्टम इन सभी को एक नई दिशा में ले जाएगा। मंत्रालय ने इस प्रणाली के लिए एक विशेष फ्रीक्वेंसी बैंड (5.875GHz से 5.925GHz) भी निर्धारित किया है, जिससे गाड़ियां रियल टाइम में डेटा का आदान-प्रदान कर सकेंगी। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले सभी नए वाहनों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम होना अनिवार्य होगा। इसमें टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, पैसेंजर व्हीकल्स और कमर्शियल व्हीकल्स शामिल हैं। मौजूदा वाहनों को भी 1 अक्टूबर 2027 से इस प्रणाली के अनुसार अपडेट करना होगा।


















