Chambers unite for development: झारखंड के 19 जिलों के चैंबर एक मंच पर, राज्य के विकास के लिए सरकार को सौंपेंगे साझा रोडमैप

झारखंड को केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि विनिर्माण, मूल्य संवर्धन, कौशल विकास, पर्यटन और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र के रूप मे
झारखंड को केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि विनिर्माण, मूल्य संवर्धन, कौशल विकास, पर्यटन और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। यह बात शनिवार को बिष्टुपुर स्थित चैंबर भवन में आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी में सामने आई, जिसमें सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री तथा फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने संयुक्त रूप से भाग लिया। संगोष्ठी का विषय 'झारखंड में अवसर एवं चुनौतियां, सतत एवं प्रतिस्पर्धी विकास पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा' रखा गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदरा रामम ने कहा कि झारखंड के पास देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन हैं। उन्होंने युवाओं के पलायन को रोकने के लिए रोजगार सृजन और पलामू, बेतला समेत अन्य प्राकृतिक स्थलों के साथ इंडस्ट्रियल टूरिज्म को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने जमशेदपुर में एक आधुनिक अंतरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्तर के एयरपोर्ट के निर्माण को कोल्हान के औद्योगिक विकास के लिए अनिवार्य बताया।
सिंहभूम चैंबर के अध्यक्ष मानव केडिया ने कहा कि झारखंड गठन के इतिहास में पहली बार राज्य के 19 जिलों के चैंबर एक मंच पर एकजुट हुए हैं। अब सभी चैंबर एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी बनकर कार्य करेंगे। संगोष्ठी से प्राप्त सभी व्यावहारिक सुझावों का एक दस्तावेज तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा जाएगा, ताकि निवेश अनुकूल नीतियां बनाई जा सकें। वहीं, फेडरेशन चैंबर के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने आगामी 10 वर्षों के लिए दीर्घकालिक औद्योगिक नीति और राज्य में 1000 नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा।



















