China Tightens Business Visa Rules: भारतीय कारोबारियों की चिंता बढ़ी

भारत और चीन के बीच व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। चीन ने भारतीय कारोबारियों और कंपनियों के अधिकारियों को बिजनेस वीजा देने में
भारत और चीन के बीच व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। चीन ने भारतीय कारोबारियों और कंपनियों के अधिकारियों को बिजनेस वीजा देने में सख्ती बढ़ा दी है। इसका असर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों पर पड़ रहा है।
चीन जाने वाले भारतीय अधिकारियों को अब वीजा प्राप्त करने में पहले के मुकाबले अधिक समय लग रहा है। इसके अलावा, बड़ी संख्या में आवेदन भी खारिज किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कार्यरत कुछ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में चीन ने केवल 20 से 40 प्रतिशत बिजनेस वीजा आवेदन ही मंजूर किए हैं। पहले लगभग सभी आवेदनों को स्वीकृति मिल जाती थी।
चीन की ओर से वीजा देने में यह सख्ती ऐसे समय में की जा रही है जब भारत कई उद्योगों के लिए चीन पर निर्भर है। भारत चीन से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, मशीनरी, उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करता है। विभिन्न उद्योगों में चीन से आने वाले कंपोनेंट्स और कैपिटल गुड्स की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में भारतीय कंपनियों के अधिकारियों का चीन नहीं पहुंच पाना केवल यात्रा से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रोजेक्ट शुरू करने, मशीनरी की जांच, तकनीकी बातचीत, सप्लायर से मिलने और उत्पादन से जुड़े कार्यों पर भी असर डाल सकता है।
कई कंपनियों ने अनौपचारिक रूप से केंद्र सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया है। कंपनियों ने सरकार से अपील की है कि वह राजनयिक स्तर पर चीन के सामने वीजा की समस्या को उठाए। भारत-चीन संबंधों से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि चीन भारत की आर्थिक तरक्की में रुकावट डालने के लिए विभिन्न कदम उठा सकता है। उनके अनुसार, भारतीय कारोबारियों के वीजा आवेदन खारिज करना भी इसी तरह का एक कदम हो सकता है। हालांकि, यह एक व्यक्ति का दावा है। चीन के नई दिल्ली स्थित दूतावास ने इस मामले पर भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।



















