Import from China to India rises 39% in 5 years: चीन से भारत का आयात 5 साल में 39% बढ़ा, क्यों नहीं घट रही निर्भरता?

भारत में मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और pli जैसी योजनाओं के माध्यम से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य य
भारत में मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और PLI जैसी योजनाओं के माध्यम से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य यह है कि देश को आवश्यक सामान और औद्योगिक उत्पादों के लिए अन्य देशों पर कम निर्भर रहना पड़े। लेकिन चीन के मामले में स्थिति कुछ अलग नजर आती है, क्योंकि चीन से भारत का आयात लगातार बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
राज्यसभा में 7 अगस्त 2026 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार, 2021-22 में भारत ने चीन से 94.57 अरब डॉलर का सामान आयात किया था, जो 2025-26 में बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया। इस तरह, पिछले पांच वर्षों में चीन से भारत का आयात लगभग 39 प्रतिशत बढ़ा है। कुल भारतीय मर्चेंडाइज आयात में चीन की हिस्सेदारी भी 15.43 प्रतिशत से बढ़कर 16.96 प्रतिशत हो गई है।
आयात में वृद्धि का सीधा असर भारत-चीन व्यापार घाटे पर पड़ा है। 2021-22 में व्यापार घाटा 73.31 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 112.16 अरब डॉलर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि भारत जितना सामान चीन से खरीद रहा है, उसके मुकाबले चीन को भारतीय सामान की बिक्री काफी कम है। 2025-26 में चीन को भारत के निर्यात में बढ़ोतरी हुई, लेकिन आयात का आकार इससे कई गुना अधिक रहा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस वर्ष भारत का चीन को निर्यात लगभग 19.47 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 131.63 अरब डॉलर था, जिससे व्यापार घाटा 112.16 अरब डॉलर बना। यह स्थिति केवल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे माल, मशीनरी और तकनीकी उपकरणों की भी आवश्यकता है।


















