Colorful Scraps Turned into Employment: देवरिया में आत्मनिर्भरता का नया आधार

देवरिया के सुधांशु त्रिपाठी की रिपोर्ट के अनुसार, शहर की टेलरिंग गलियों में सुबह-सुबह रंग-बिरंगी कपड़ों की कतरनें बिखरी नजर आती हैं। ये कतरनें शाम होते-होते कूड
देवरिया के सुधांशु त्रिपाठी की रिपोर्ट के अनुसार, शहर की टेलरिंग गलियों में सुबह-सुबह रंग-बिरंगी कपड़ों की कतरनें बिखरी नजर आती हैं। ये कतरनें शाम होते-होते कूड़े में चली जाती थीं, लेकिन अब इन्हीं कतरनों ने कुछ महिलाओं के लिए रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की नई कहानी लिख दी है। अमृता तिवारी ने वर्ष 2022 में 'ख्वाहिश क्रिएशन' की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने बेकार समझी जाने वाली कपड़ों की कतरनों को नया जीवन देने का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी और उन्होंने जागृति एंटरप्राइज सेंटर के इनक्यूबेशन प्रोग्राम से जुड़कर अपने उद्यम को व्यवस्थित किया। इस प्रोग्राम के दौरान मिले मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव ने 'ख्वाहिश क्रिएशन' को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमृता की टीम स्थानीय टेलरिंग दुकानों, बुटीक और कपड़ा प्रतिष्ठानों से कपड़ों की कतरनें एकत्र करती है। इन कतरनों को रंग, बनावट और गुणवत्ता के आधार पर अलग किया जाता है। इसके बाद इन्हीं टुकड़ों से महिलाओं के सूट, कुर्ती, बच्चों के कपड़े, बैग, कुशन कवर और घर की सजावट के आकर्षक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। अमृता के उत्पाद अब उत्तर भारत के विभिन्न शहरों में इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, रिटेल स्टोर और प्रदर्शनी के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। अब तक का सबसे बड़ा आर्डर पांच हजार उत्पादों का रहा, जिसमें करीब 300 किलोग्राम कपड़ों की कतरनों का उपयोग किया गया।



















