Gold Loan: गोल्ड लोन लेने वालों की बढ़ेंगी मुश्किलें, हर महीने देनी होगी EMI; बदल जाएंगे कर्ज चुकाने के नियम?

अगर आप अपनी किसी आपातकालीन जरूरत, व्यवसाय या व्यक्तिगत काम के लिए सोने के गहने गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपको जल्द ही एक बड़ा झटका लग स
अगर आप अपनी किसी आपातकालीन जरूरत, व्यवसाय या व्यक्तिगत काम के लिए सोने के गहने गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपको जल्द ही एक बड़ा झटका लग सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, देश का गोल्ड लोन बाजार आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव से गुजरने वाला है। इस बदलाव के कारण गोल्ड लोन लेने और चुकाने के तरीके में बदलाव आएगा, जिससे गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में भी वृद्धि हो सकती है। अब तक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से गोल्ड लोन लेने वाले लगभग 90 प्रतिशत ग्राहक एकमुश्त भुगतान (बुलेट पेमेंट) का विकल्प चुनते थे। इस प्रणाली में ग्राहक को लोन की अवधि के दौरान हर महीने किस्त का भुगतान नहीं करना होता था, बल्कि लोन की अवधि समाप्त होने पर मूलधन और ब्याज की पूरी राशि एक साथ चुकानी होती थी। लेकिन अब इसे नियमित मासिक किस्तों वाले लोन में बदलने से निकट भविष्य में बकाया बढ़ सकता है, क्योंकि लेनदार बुलेट पेमेंट के मुकाबले नई प्रणाली के अनुसार खुद को ढालने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। इक्रा का अनुमान है कि बुलेट पेमेंट से नियमित ईएमआई प्रणाली में जाने से गोल्ड लोन से जुड़े एनपीए में वृद्धि हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, स्वर्ण आभूषण के बदले लिया गया बकाया कर्ज 31 मई, 2026 तक 5.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। कैलेंडर वर्ष 2026 में कुल बकाया कर्ज में 105 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है।
बाजार पर इस बदलाव का क्या असर होगा? इक्रा के अनुसार, बैंकों और एनबीएफसी का कुल गोल्ड लोन वित्त वर्ष 2026-27 से 2027-28 के दौरान 30 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह मार्च 2026 के 18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा। अगले वित्त वर्ष तक एनबीएफसी की बाजार हिस्सेदारी 23 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। नए नियमों के लागू होने से छोटे कर्जदारों और आम ग्राहकों को हर महीने अपने बजट को व्यवस्थित करने में कठिनाई हो सकती है। पहले, ग्राहक को साल के अंत में एकमुश्त राशि चुकानी होती थी, लेकिन अब उन्हें हर महीने किस्त का भुगतान करना होगा। यदि कोई ग्राहक लोन चुकाने में असफल रहता है, तो कंपनियां गिरवी रखे गए सोने की नीलामी करके अपना पैसा वसूल करती हैं। बुलेट भुगतान की प्रणाली में लोन की अवधि के दौरान मूलधन में कमी नहीं आती। यदि वैश्विक या घरेलू बाजार में सोने के भाव अचानक गिरते हैं, तो बैंक या एनबीएफसी अतिरिक्त सोना गिरवी रखने या लोन का कुछ हिस्सा तुरंत चुकाने के लिए कह सकते हैं। नए मॉडल में, चूंकि हर महीने कुछ न कुछ भुगतान होता रहेगा, इसलिए सोने के भाव में उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम को नियंत्रित किया जा सकेगा।



















