Yarn Prices Surge: लुधियाना के निटवियर उद्योग पर बढ़ा लागत का दबाव

लुधियाना, जो कि देश का सबसे बड़ा निटवियर केंद्र माना जाता है, वहां यार्न की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने उद्योग के लिए चिंता का विषय बना दिया है। वर्ष की
लुधियाना, जो कि देश का सबसे बड़ा निटवियर केंद्र माना जाता है, वहां यार्न की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने उद्योग के लिए चिंता का विषय बना दिया है। वर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक, विभिन्न श्रेणियों के यार्न के दाम में 35 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस वृद्धि के कारण उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिससे उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो तैयार परिधानों की कीमतों में भी वृद्धि होना तय है। इसका प्रभाव न केवल घरेलू बाजार पर पड़ेगा, बल्कि निर्यात प्रतिस्पर्धा पर भी इसके नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। लुधियाना का निटवियर उद्योग इस समय बढ़ती लागत के दोहरे दबाव में है। कच्चे माल की कीमतें वैश्विक परिस्थितियों के कारण लगातार चढ़ रही हैं, और तैयार उत्पादों के दाम तुरंत बढ़ाना आसान नहीं है। इससे मुनाफे का मार्जिन लगातार सिमटता जा रहा है। लुधियाना यार्न ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान राधेश्याम आहूजा के अनुसार, जनवरी 2026 से अब तक सभी प्रमुख श्रेणी के यार्न की कीमतों में वृद्धि हुई है। पॉलिएस्टर यार्न, जो वर्ष की शुरुआत में लगभग 125 रुपये प्रति किलोग्राम था, अब 165 से 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। एक्रेलिक यार्न के दाम भी 200 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग 290 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। बाजार में फेक कॉटन के नाम से प्रचलित पॉलिएस्टर आधारित यार्न की कीमतों में भी तेज उछाल आया है, जिसके दाम 160 रुपये से 225 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। कॉटन यार्न भी लगातार महंगा हो रहा है, जिससे निटवियर उत्पादकों की लागत में वृद्धि हो रही है। आहूजा का कहना है कि यार्न की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय हालात हैं। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का सीधा प्रभाव सिंथेटिक यार्न उद्योग पर पड़ रहा है। पॉलिएस्टर और अन्य सिंथेटिक फाइबर पेट्रोकेमिकल उत्पादों से तैयार होते हैं, और जब क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो उत्पादन लागत भी स्वतः बढ़ जाती है। उनका मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में यार्न और महंगा हो सकता है।
निटवियर एंड अपैरल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना के प्रधान सुदर्शन जैन का कहना है कि उद्योग लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत को स्वयं वहन नहीं कर सकता। यदि कच्चे माल के दाम इसी रफ्तार से बढ़ते रहे, तो निर्माताओं के पास तैयार परिधानों की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। लागत बढ़ने से नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है। लुधियाना का निटवियर उद्योग लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। यदि कच्चे माल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे कारोबार की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है। उद्योग ने सरकार से स्थिति पर नजर रखने और राहत संबंधी कदमों पर विचार करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई 2026 से शुरू होने वाले शीतकालीन परिधानों के उत्पादन सीजन में कार्यशील पूंजी की आवश्यकता बढ़ गई है। आगामी विंटर सीजन में स्वेटर, थर्मल और ट्रैक सूट जैसे निटवियर उत्पादों की खुदरा कीमतों में वृद्धि देखने को मिल सकती है। इससे उपभोक्ता मांग और उद्योग की लाभप्रदता दोनों पर असर पड़ने की संभावना है।



















