








सिरोही के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक-1 ने 15 वर्ष पुराने सड़क हादसे में दो लोगों की मौत के मामले में दोषी विक्रम उर्फ विक्की बारोट की अपील को खारिज कर द
सिरोही के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक-1 ने 15 वर्ष पुराने सड़क हादसे में दो लोगों की मौत के मामले में दोषी विक्रम उर्फ विक्की बारोट की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने विक्रम को दो वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। न्यायाधीश कुलदीप सूत्रधार ने इस मामले में अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा को सही ठहराते हुए कहा कि दोषी की लापरवाही के कारण दो निर्दोष लोगों की जान गई। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत उचित ठहराया गया है। विक्रम उर्फ विक्की बारोट ने पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा सुनाए गए फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें उसने सजा पर पुनर्विचार की मांग की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर लोक अभियोजक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को सही मानते हुए अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को यथावत रखा। इस मामले में अपर लोक अभियोजक राजश्री व्यास और दिनेश खंडेलवाल ने पैरवी की।
इस सड़क हादसे की घटना 20 जुलाई 2011 को हुई थी, जब नयाखेड़ा (पोस्ट सांतपुर, आबूरोड) निवासी गणेश आचार्य ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसके भाई ईश्वर आचार्य और भतीजे योगेश आचार्य रात में एक्टिवा से कार्यालय से घर लौट रहे थे। इसी दौरान सांतपुर निवासी विक्रम उर्फ विक्की बारोट ने तेज गति और लापरवाही से स्विफ्ट कार चलाते हुए एक्टिवा को पीछे से टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में ईश्वर आचार्य और योगेश आचार्य की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के प्रत्यक्षदर्शी प्रवीण और रवि राणा थे, जिन्होंने पुलिस को घटना के बारे में जानकारी दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और बाद में न्यायालय में चालान पेश किया।
इस मामले में अदालत का निर्णय न केवल न्यायिक प्रक्रिया को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सड़क पर लापरवाह ड्राइविंग के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। विक्रम उर्फ विक्की बारोट की लापरवाही ने दो परिवारों को हमेशा के लिए प्रभावित किया है। अदालत के इस फैसले से यह संदेश भी जाता है कि न्यायालय ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सड़क पर लापरवाही से वाहन चलाने की हिम्मत न करे। यह फैसला उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो सड़क पर तेज गति से वाहन चलाते हैं और दूसरों की जान को खतरे में डालते हैं।
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