Maoist Network Dismantled in Saranda: मिसिर बेसरा का भरोसेमंद था मोछू, कैडरों की भर्तियों का जिम्मा संभालता था बिरेन

जागरण संवाददाता, चाईबासा। गिरिडीह से गिरफ्तार माओवादी नेताओं में शामिल तुंबा मांझी उर्फ मोछू उर्फ विभीषण उर्फ मेहनत को लंबे समय तक प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का
जागरण संवाददाता, चाईबासा। गिरिडीह से गिरफ्तार माओवादी नेताओं में शामिल तुंबा मांझी उर्फ मोछू उर्फ विभीषण उर्फ मेहनत को लंबे समय तक प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का एक महत्वपूर्ण कमांडर माना जाता रहा है। धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के घोड़ाबांधा गांव का निवासी मोछू संगठन में रीजनल कमेटी सदस्य (आरसीएम) के पद तक पहुंच गया था। वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, रीजनल कमेटी सदस्य का दायित्व केवल एक जिले तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसे कई जिलों में सक्रिय माओवादी दस्तों के बीच समन्वय स्थापित करने, नए कैडरों को संगठित करने, संगठन के विस्तार की रणनीति बनाने और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। मोछू ने सारंडा के दुर्गम जंगलों और सीमावर्ती गांवों में माओवादियों का मजबूत नेटवर्क खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह लंबे समय तक संगठन के लिए सुरक्षित ठिकाने विकसित करने, स्थानीय संपर्कों को मजबूत करने और दस्तों की आवाजाही सुनिश्चित करने का कार्य करता रहा। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि पश्चिमी सिंहभूम में हुए कई बड़े नक्सली हमलों में मोछू की भूमिका रही। उस पर जंगल के रास्तों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों वाले इलाकों में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बिछाने की रणनीति और उसकी निगरानी का भी आरोप रहा है। इसी कारण वह सुरक्षा एजेंसियों की सबसे वांछित सूची में शामिल था। अधिकारियों का मानना है कि मोछू की गिरफ्तारी से सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवादी संगठन के मध्य स्तर के नेतृत्व और उसके स्थानीय नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
धनबाद-गिरिडीह बॉर्डर से गिरफ्तार माओवादियों में शामिल बिरेन हांसदा उर्फ गौरव माओवादी संगठन का एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम) था। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के सतकटिया गांव का निवासी है और लंबे समय से संगठन के लिए सक्रिय बताया जाता है। माओवादी संगठन में एसीएम की जिम्मेदारी किसी विशेष इलाके में संगठन को मजबूत करना, नए कैडरों की भर्ती, जनसंगठन तैयार करना और स्थानीय दस्तों के संचालन में सहयोग करना होता है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यही स्तर संगठन के लिए नए नेतृत्व की नर्सरी माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि बिरेन हांसदा उर्फ गौरव को संगठन का उभरता हुआ कैडर माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी से स्थानीय स्तर पर माओवादी संगठन की गतिविधियों और भर्ती अभियान को झटका लग सकता है।
















