Police Parade of Criminals in Indore: फर्जी पट्टे के विवाद में पुलिस की जांच बढ़ी

इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में हाल ही में एक विवाद ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आरोपितों के हाथों पर बंधे कथित फर्जी पट्टे के मामले ने अब एक नय
इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में हाल ही में एक विवाद ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आरोपितों के हाथों पर बंधे कथित फर्जी पट्टे के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। पहले सेंट्रल जेल का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें आरोपितों को पुलिस द्वारा जुलूस के रूप में पेश किया गया था। अब इस मामले की जांच अस्पताल के रिकॉर्ड तक पहुंच गई है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपितों के हाथ पर पट्टा किस डॉक्टर की सलाह पर बांधा गया था और जेल पहुंचने से पहले इसे क्यों और कैसे हटाया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसीपी जोन-3 ओमप्रकाश ने जांच का जिम्मा अपने हाथ में लिया है। उन्होंने इलाज से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। इसके साथ ही आरोपितों का उपचार करने वाले डॉक्टरों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों और अस्पताल के रिकॉर्ड के बीच सामने आए तथ्यों का मिलान किया जा रहा है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब हीरानगर थाने से गिरफ्तार किए गए आरोपित मयंक और शोभित का एक वीडियो सेंट्रल जेल में सामने आया। दोनों आरोपितों को कार में तोड़फोड़ और हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद थाना प्रभारी सुशील पटेल ने उनका जुलूस निकाला था। आरोप है कि जेल ले जाते समय पीसीआर में तैनात सिपाही जफर खान ने दोनों के हाथों पर बंधे पट्टे को खोल दिया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठने लगे। इस मामले की जांच अब डीसीपी अभिषेक रंजन के नेतृत्व में की जा रही है। एसीपी रुबिना मिजवानी, टीआई सुशील पटेल और एसआई दिनेश त्रिपाठी समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।


















