Empowering Women Digitally: महिलाओं की डिजिटल साक्षरता से ही पूरा होगा डिजिटल भारत का सपना

भारत को विकसित राष्ट्र के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। देश की जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा महिलाएँ हैं, और आज विकास का
भारत को विकसित राष्ट्र के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। देश की जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा महिलाएँ हैं, और आज विकास का आधार डिजिटल तकनीक बन चुकी है। शिक्षा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं का लाभ, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सहभागिता हर क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो रही है। यदि महिलाएँ डिजिटल दुनिया से दूर रह जाती हैं, तो यह केवल लैंगिक असमानता का प्रश्न नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है।
भारत डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करने का दावा करता है, लेकिन महिलाओं की पहुँच डिजिटल सुविधाओं तक पुरुषों की तुलना में कम है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों, आदिवासी इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएँ आज भी डिजिटल संसाधनों से जुड़ने में पीछे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि तकनीकी विकास तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं तक पहुँचे।
इस संदर्भ में आजीवन शिक्षा की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा विद्यालय या महाविद्यालय तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बदलती तकनीकों के साथ निरंतर सीखना आवश्यक है। अगर प्रत्येक गाँव, वार्ड और समुदाय में महिलाओं के लिए नियमित डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम चलाए जाएँ, तो लाखों महिलाएँ आत्मनिर्भर बन सकती हैं। स्वयं सहायता समूह, पंचायतें, महिला मंडल, पुस्तकालय और सामुदायिक शिक्षा केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान, डिजिटल इंडिया, कॉमन सर्विस सेंटर और विभिन्न कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से कई प्रयास किए हैं, जिनसे लाखों महिलाओं को लाभ मिला है। लेकिन अभी भी यह प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। आवश्यकता है ऐसी रणनीति की जिसमें प्रत्येक ग्राम पंचायत में महिला डिजिटल शिक्षा केंद्र स्थापित हों। स्कूलों और कॉलेजों के साथ-साथ सार्वजनिक पुस्तकालयों को भी डिजिटल प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाए।


















