Gorakhgiri Pilgrimage on Guru Purnima: गुरु पूर्णिमा पर गोरखगिरि की ऐतिहासिक परिक्रमा

महोबा। गुरु गोरखनाथ परिक्रमा समिति द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ऐतिहासिक गोरखगिरि की परिक्रमा का आयोजन बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और रामधुन के साथ किया गया। इस
महोबा। गुरु गोरखनाथ परिक्रमा समिति द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ऐतिहासिक गोरखगिरि की परिक्रमा का आयोजन बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और रामधुन के साथ किया गया। इस अवसर पर भक्तों ने विभिन्न रचनाओं के माध्यम से गुरु की महिमा का गुणगान किया। परिक्रमा की शुरुआत प्राचीन शिवतांडव मंदिर से हुई, जो कि पठवा के बाल हनुमान मंदिर, रामजानकी मंदिर, संत कबीर आश्रम, छोटी चंद्रिका और राम दरबार होते हुए गुजरी। इस दौरान भक्तों ने अपने श्रद्धा भाव से इस परिक्रमा में भाग लिया और अपने गुरु के प्रति अपनी भक्ति प्रकट की। परिक्रमा के बाद आयोजित हवन, पूजन और सत्संग में डॉ. एलसी अनुरागी ने उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु सम्राटों का सम्राट और फकीरों का फकीर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि गुरु ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान होते हैं, इसलिए हमें गुरु की चरणों की रज का आशीर्वाद लेना चाहिए। इस अवसर पर पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी, साहित्यकार संतोष कुमार पटैरिया, पं. हरीशंकर नायक, सुनीता अनुरागी, मुन्नालाल धुरिया, पवन चौरसिया, राकेश, गौरीशंकर, रज्जू द्विवेदी, अजीत आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का अवसर होता है। इस दिन भक्तजन अपने गुरु की शिक्षाओं को याद करते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। गोरखगिरि की परिक्रमा का आयोजन इस दिन को और भी विशेष बनाता है। भक्तों ने इस परिक्रमा में भाग लेकर न केवल अपने गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त की, बल्कि समाज में गुरु की महत्ता को भी उजागर किया। इस परिक्रमा के दौरान भक्तों ने एकजुट होकर रामधुन गाई और सामूहिक रूप से पूजा अर्चना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक था, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक था।



















