Medical Education Expansion: जम्मू-कश्मीर में MBBS सीटें 500 से बढ़कर 1725 हुईं

जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। पुनर्गठन के बाद, अब यहां के मेडिकल कॉलेजों म
जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। पुनर्गठन के बाद, अब यहां के मेडिकल कॉलेजों में देशभर के छात्रों को एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है। पहले, वर्ष 2019 से पहले अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में केवल 500 एमबीबीएस सीटें थीं, जिन पर केवल स्थानीय छात्रों का ही अध्ययन होता था। इस व्यवस्था के कारण, जम्मू-कश्मीर के छात्रों को अन्य राज्यों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अवसर नहीं मिलता था। अब, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस की सीटें बढ़कर 1725 हो गई हैं, जिनमें से 15 प्रतिशत सीटें देशभर के छात्रों के लिए आरक्षित हैं। यह परिवर्तन न केवल स्थानीय छात्रों के लिए बल्कि अन्य राज्यों के छात्रों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। अब जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थी भी अखिल भारतीय कोटे में प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, जिससे उनकी शिक्षा का स्तर और भी ऊँचा हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था का लाभ सभी छात्रों को मिल रहा है। देशभर के विद्यार्थी अब जम्मू-कश्मीर के मेडिकल कॉलेजों में आकर पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं स्थानीय छात्र भी अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पा रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में चिकित्सा शिक्षा को एक नई दिशा मिली है। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। जैसे कि कठुआ, राजौरी, डोडा, बारामुला और अनंतनाग में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की घोषणा 2014 में की गई थी, लेकिन इन कॉलेजों का निर्माण 2019 के बाद ही संभव हो सका। उधमपुर और हंदवाड़ा में भी नए मेडिकल कॉलेज 2023 में खोले गए हैं। इसके अलावा, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान विजयपुर में खुल चुका है और अवंतीपुरा में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।



















