Moohan Bhagwat on Education Reform: Gen-Z से पहले बात होनी चाहिए थी, देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए gen z प्रोटेस्ट पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लो
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए Gen Z प्रोटेस्ट पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक वैध तरीका है, लेकिन इसका उद्देश्य विभाजन पैदा करने के बजाय आम सहमति बनाना होना चाहिए। भागवत ने प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि Gen Z की शिकायतें जायज हैं, क्योंकि भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
मुंबई में जेन जी और जेन अल्फा के सदस्यों के साथ संवाद के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध भी आम सहमति बनाने का एक तरीका है। उन्होंने बताया कि विभिन्न विचारों के सामने आने के बाद चर्चा के जरिए सहमति बनती है। अगर किसी कारणवश बात नहीं सुनी जाती, तो आंदोलन किया जा सकता है। यह टिप्पणी नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शन के बीच आई है।
भागवत ने इस अहम क्षेत्र पर खर्च को बजट का छह प्रतिशत तक बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने मुंबई में इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में Gen Z और जेन अल्फा के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन भी बातचीत का एक तरीका है।
आरएसएस चीफ ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन आम सहमति बनाने का एक जरिया है। विभिन्न विचारों के समागम के बाद सहमति बनती है। अगर बातचीत से चिंताओं का समाधान नहीं होता, तो लोग आंदोलन की ओर जा सकते हैं। उन्होंने Gen Z की ईमानदारी पर भरोसा जताया।



















