PhD Regulations Ignored: यूजीसी ने 5 विश्वविद्यालयों पर लगाई रोक, 30 रडार पर

पीएचडी से जुड़े मानकों और नियमों के पालन में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और पीएचडी कार्यक्रमों
पीएचडी से जुड़े मानकों और नियमों के पालन में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और पीएचडी कार्यक्रमों की जांच शुरू कर दी है। अब तक 92 विश्वविद्यालयों की जांच पूरी की जा चुकी है, जिनमें से पांच विश्वविद्यालयों में गंभीर गड़बड़ियों का पता चला है। इन विश्वविद्यालयों पर अगले पांच वर्षों के लिए पीएचडी कार्यक्रमों को संचालित करने पर रोक लगा दी गई है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र इस अवधि में इन संस्थानों के पीएचडी पाठ्यक्रमों में दाखिला लेता है, तो उनके प्रवेश और डिग्री दोनों को अवैध माना जाएगा। इसके अलावा, 30 अन्य विश्वविद्यालय भी यूजीसी की निगरानी में हैं, जिनकी दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
देश के अन्य विश्वविद्यालयों और पीएचडी प्रदान करने वाले संस्थानों की जांच चरणबद्ध तरीके से की जा रही है, जिसमें 2016 से 2025 के बीच प्रदान की गई पीएचडी डिग्रियों को शामिल किया गया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्या यूजीसी द्वारा 2009, 2016 और 2022 में जारी किए गए नियमों और मानकों का पालन किया गया है। इस जांच में पीएचडी के लिए प्रवेश, सिनोप्सिस, थीसिस और गाइड चयन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। यूजीसी ने पीएचडी से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायतों के आधार पर नए नियम और मानक निर्धारित किए थे, ताकि थीसिस में नकल को रोका जा सके। हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने संसद में इस जांच की जानकारी भी दी है।



















