Patna HC delivers blow to Samrat government: अनुकंपा शिक्षकों को अब मिलेगी नियमित सैलरी

पटना। पटना हाई कोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्त तीन प्रखंड/नगर शिक्षकों को नियमित वेतनमान देने के मामले में राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण झटका दिया है। अदालत
पटना। पटना हाई कोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्त तीन प्रखंड/नगर शिक्षकों को नियमित वेतनमान देने के मामले में राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिला अनुकंपा समिति द्वारा अनुशंसा में हुई प्रशासनिक देरी का खामियाजा मृतक कर्मियों के आश्रितों को नहीं भुगतना पड़ेगा। यह निर्णय न्यायाधीश हरिश कुमार की एकलपीठ द्वारा लिया गया, जिसने सुजीत कुमार चौधरी, पंकज कुमार और मनोज कुमार की अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं के पिता वर्ष 2006 से पहले सेवा में रहते हुए दिवंगत हो गए थे और उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए समय पर आवेदन भी किया था। लेकिन सरकारी स्तर पर लगी रोक और प्रशासनिक विलंब के कारण उनकी अनुशंसा 1 जुलाई 2006 के बाद हुई। इसके परिणामस्वरूप उन्हें नियमित शिक्षक के बजाय निश्चित मानदेय पर प्रखंड/नगर शिक्षक नियुक्त कर दिया गया।
अदालत ने शिक्षा विभाग द्वारा उनके दावों को ठुकराने वाले आदेशों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए रद्द कर दिया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि तीन माह के भीतर सभी मामलों पर नए सिरे से निर्णय लेकर नियमित वेतनमान सहित सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि जिला अनुकंपा समिति की अनुशंसा कब हुई, यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया है, और इसमें हुई देरी के लिए आश्रितों को दंडित नहीं किया जा सकता। यदि समान परिस्थितियों वाले अन्य लोगों को राज्य सरकार नियमित वेतनमान का लाभ दे चुकी है, तो इन्हें उससे वंचित रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा।



















