Owls Protect Crops: एक जोड़ा उल्लू सालभर में बचाता है फसलों को, चूहों का शिकार कर बनाए रखता है संतुलन

जमशेदपुर में अंतर्राष्ट्रीय उल्लू जागरूकता दिवस के अवसर पर दलमा वन्यजीव अभयारण्य में उल्लुओं के संरक्षण और उनकी पारिस्थितिकीय भूमिका को लेकर जागरूकता अभियान चला
जमशेदपुर में अंतर्राष्ट्रीय उल्लू जागरूकता दिवस के अवसर पर दलमा वन्यजीव अभयारण्य में उल्लुओं के संरक्षण और उनकी पारिस्थितिकीय भूमिका को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। इस वर्ष की थीम का मुख्य ध्यान दलमा पहाड़ी श्रृंखला को उल्लुओं के लिए अनुकूल बनाने पर केंद्रित रहा। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि दलमा की जैव विविधता और प्राकृतिक वातावरण उल्लुओं के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल प्रदान करते हैं। दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि अभयारण्य में विभिन्न प्रजातियों के उल्लू बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, जो यहां के पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का संकेत देते हैं। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से उल्लुओं के संरक्षण में सहयोग की अपील की।
वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट प्रसेनजीत सरकार ने उल्लुओं के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये वास्तव में किसानों के मित्र हैं। एक जोड़ा उल्लू सालभर में 1,000 से अधिक चूहों का शिकार कर सकता है, जिससे फसलों को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। यदि उल्लुओं की संख्या में कमी आती है, तो चूहों की आबादी में वृद्धि हो सकती है, जो फसलों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। उल्लू अपनी ध्वनिरहित उड़ान और तीक्ष्ण दृष्टि के कारण रात्रिकालीन शिकारी माने जाते हैं और इन्हें पर्यावरण स्वास्थ्य का बायो-इंडिकेटर भी कहा जाता है।



















