Student Corrected Birth Date: नौ साल की उम्र में 10वीं पास, 14 वर्षों बाद यूपी बोर्ड ने सुधारी जन्मतिथि

वाराणसी से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसमें माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की एक लिपिकीय चूक के कारण एक छात्र को 14 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। यह मामल
वाराणसी से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसमें माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की एक लिपिकीय चूक के कारण एक छात्र को 14 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। यह मामला जौनपुर के दुर्ग देव जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से संबंधित है, जहां मनीष कुमार सिंह ने वर्ष 2008 में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इस परीक्षा में उनकी जन्मतिथि 21 मई 1999 दर्ज की गई थी, जो कि एक गंभीर गलती थी। इस गलती के कारण मनीष को महज नौ साल की उम्र में हाईस्कूल पास करने का प्रमाणपत्र मिल गया था, जबकि उनकी असली जन्मतिथि 21 मई 1993 थी। इस मामले में छात्र ने वर्ष 2012 में त्रुटि सुधार के लिए आवेदन किया था, लेकिन यूपी बोर्ड ने इसे समयसीमा बीत जाने का हवाला देकर खारिज कर दिया। इसके बाद मनीष ने 2021 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए बोर्ड प्रशासन को कड़े निर्देश दिए। अदालत ने पूछा कि कैसे एक नौ साल के बच्चे को 10वीं का प्रमाणपत्र जारी किया गया। इसके बाद, क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी के उप सचिव ने संबंधित विद्यालयों की स्थलीय जांच की। इस जांच में मनीष की सही जन्मतिथि की पुष्टि हुई, जिसके बाद अपर सचिव भास्कर मिश्र ने त्रुटि सुधार को न्यायसंगत मानते हुए मामले को आगे बढ़ाया। अंततः, छात्र को उसकी सही जन्मतिथि के साथ नई मार्कशीट और सह-प्रमाणपत्र जारी किया गया। इस प्रकार, 14 वर्षों का लंबा संघर्ष अब समाप्त हुआ।



















