Teachers' Surplus in Bihar: शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं

दरभंगा में शिक्षकों के बीच हाल ही में सरकार द्वारा लागू किए गए नए शिक्षक मानक मंडल के कारण हलचल मची हुई है। इस नए मानक के अंतर्गत प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक
दरभंगा में शिक्षकों के बीच हाल ही में सरकार द्वारा लागू किए गए नए शिक्षक मानक मंडल के कारण हलचल मची हुई है। इस नए मानक के अंतर्गत प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को सरप्लस घोषित किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में चिंता और असंतोष बढ़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि जब सरकार के पास पहले से ही सरप्लस शिक्षक हैं, तो नई बहाली की आवश्यकता क्यों है? यह सवाल शिक्षकों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
इस संदर्भ में, बीते बुधवार को सर्वोदय हाई स्कूल में शिक्षकों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न प्लस टू हाई स्कूलों के शिक्षक शामिल हुए। बैठक में कुछ शिक्षकों ने उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी, जबकि अन्य ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को आवेदन देने की बात की। एक शिक्षक ने बताया कि उनके स्कूल में उर्दू के एकमात्र शिक्षक को सरप्लस घोषित कर दिया गया है, जबकि उस विषय में 200 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इसी तरह, अन्य स्कूलों के शिक्षकों को भी सरप्लस घोषित किया गया है, जिससे उनकी नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।
इस समय दरभंगा में तीन हजार से अधिक शिक्षकों को सरप्लस घोषित किया गया है। यह स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि 1999 बैच के कई प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षकों को भी सरप्लस कर दिया गया है, जबकि 2008 में नियोजित शिक्षकों को कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। इस मुद्दे पर प्राथमिक शिक्षक संघ के नेताओं ने कहा है कि वे उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने पहले आश्वासन दिया था कि बाद में आने वाले शिक्षकों का पदस्थापन समानुपातिकरण के आधार पर किया जाएगा, लेकिन अब केवल पुराने शिक्षकों को ही सरप्लस घोषित किया गया है। यह स्थिति शिक्षकों के लिए अत्यंत निराशाजनक है और उन्हें न्याय की उम्मीद है।



















