Sawan Som Pradosh Vrat: सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सावन मास का सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व कई गुन
सावन मास का सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, व्रत और जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सावन सोम प्रदोष व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इस पावन अवसर पर शुभ मुहूर्त में पूजा कर शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस साल सावन में प्रदोष व्रत 10 अगस्त को रखा जाएगा। फ्यूचर पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त को सुबह 08:00 ए एम से शुरू होगी और इसका समापन 11 अगस्त को प्रात: 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। इस प्रकार, सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को मनाया जाएगा।
सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 07 बजकर 05 मिनट से शुरू होगा और रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी माना जाता है। इसके अलावा, सोम प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:23 ए एम से 05:06 ए एम तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 पी एम से लेकर 12:53 पी एम तक है।
भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली पंचाक्षरी मंत्र है: ॐ नमः शिवाय। इसके अलावा, महामृत्युंजय मंत्र और शिव गायत्री मंत्र भी इस दिन का विशेष महत्व रखते हैं। इस दिन श्रद्धालु इन मंत्रों का जाप करते हैं।



















