Typhoid cases rising in monsoon: बारिश के मौसम में बढ़ रहे टाइफाइड के मामले, डॉक्टर से जानें क्या हैं लक्षण और बचाव के तरीके

बारिश के मौसम में बुखार, पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है। ये लक्षण टाइफाइड बुखार के हो सकते हैं, जो सा
बारिश के मौसम में बुखार, पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है। ये लक्षण टाइफाइड बुखार के हो सकते हैं, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है। इस मौसम में पानी का दूषित होना इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण है। टाइफाइड के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, और इसलिए इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है। टाइफाइड के लक्षणों की पहचान करना और सही समय पर उपचार कराना बहुत महत्वपूर्ण है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, टाइफाइड का संक्रमण फीकल ओरल रूट से फैलता है। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति दूषित भोजन या पानी का सेवन करता है, तो बैक्टीरिया उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉ. सुभाष बताते हैं कि टाइफाइड के लक्षणों में बुखार, पेट दर्द, उल्टी और दस्त शामिल हैं। कुछ मरीजों में बीमारी के दूसरे सप्ताह के बाद लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं, जैसे मेनिन्जाइटिस, एन्सेफलाइटिस, सेप्सिस और सेप्टिक शॉक। ये स्थितियाँ मल्टी ऑर्गन फेल्योर का कारण बन सकती हैं, जो जानलेवा हो सकता है। इसलिए, टाइफाइड की शुरुआत में ही इसका इलाज कराना आवश्यक है। टाइफाइड की पहचान के लिए ब्लड कल्चर जांच की जाती है, और यदि आवश्यक हो तो विडाल टेस्ट भी किया जा सकता है। डॉक्टर अन्य टेस्ट जैसे सीबीसी और ईएसआर कराने की सलाह भी दे सकते हैं। यदि टेस्ट में टाइफाइड का पता चलता है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराना चाहिए और दवा का कोर्स बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।



















