NCR pollution impact: एनसीआर में बाल अस्थमा के 23% मरीज, ICCT रिपोर्ट में खुलासा

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में देश की कुल आबादी का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा निवास करता है, लेकिन यहां व
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में देश की कुल आबादी का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा निवास करता है, लेकिन यहां वाहनों के धुएं के कारण बच्चों में अस्थमा के मामलों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आइसीसीटी) द्वारा जारी की गई एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों में अस्थमा के 23 प्रतिशत नए मामले, जो सालाना लगभग 3,500 हैं, अकेले इसी क्षेत्र से सामने आ रहे हैं। यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। वर्ष 2024 में एनसीआर में वाहन उत्सर्जन के कारण 8,100 असमय मौतें हुईं, जो कि देश में हुई कुल मौतों का लगभग नौ प्रतिशत है। इनमें से 2,800 मौतें केवल दिल्ली में हुईं, जो कि इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती हैं।
आइसीसीटी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिल्ली में बच्चों में अस्थमा के 1,500 नए मामले सामने आए हैं। एनसीआर के सबसे प्रदूषित इलाकों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमाओं से कई गुना अधिक हो गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि भारी मालवाहक और यात्री वाहन, जैसे ट्रक और बसें, हवा को प्रदूषित करने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। हालांकि इनकी संख्या कुल वाहनों में कम है, लेकिन 2024 में वाहन उत्सर्जन से होने वाले विषैले नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का 79 प्रतिशत और पीएम का 64 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं भारी वाहनों से आया है।



















