Organ Donation Awareness: अंगदान महादान, फिर भी जरूरत के सामने बौना भारत

पीटीआई, नई दिल्ली। 'अंगदान महादान' का संदेश वर्षों से लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करता आ रहा है, लेकिन जब वास्तविकता की बात आती है तो तस्वीर कुछ और ही नजर आत
पीटीआई, नई दिल्ली। 'अंगदान महादान' का संदेश वर्षों से लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करता आ रहा है, लेकिन जब वास्तविकता की बात आती है तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। भारत में 2021 के दौरान जितने हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी, उसका केवल 0.2 प्रतिशत ही पूरा हो सका। इसी तरह, फेफड़ों के लिए यह आंकड़ा 1.2 प्रतिशत, लिवर के लिए 1.5 प्रतिशत और किडनी के लिए 7.2 प्रतिशत रहा। यह स्थिति दर्शाती है कि जरूरत और उपलब्धता के बीच की खाई इतनी बड़ी है कि हजारों मरीजों की जिंदगी आज भी इंतजार पर टिकी हुई है। यह चौंकाने वाली जानकारी द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित अध्ययन में सामने आई है। इस अध्ययन में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज सहित अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज 2021 के आंकड़ों और 2040 तक की जनसंख्या परियोजनाओं का विश्लेषण किया है। उन्होंने पहली बार किडनी, लिवर, हार्ट और लंग प्रत्यारोपण की देशव्यापी जरूरत का आकलन किया है। अध्ययन के अनुसार, 2040 तक हर साल 1,43,722 किडनी, 2,10,649 लिवर, 95,711 हार्ट और 12,846 लंग ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होगी। शोधकर्ताओं ने तुर्किये, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे उभरते देशों के अनुभव के आधार पर 'मामूली सुधार' को भारत के लिए सबसे व्यावहारिक परिदृश्य माना है। इसके बावजूद, 2040 तक किडनी की जरूरत का केवल 32.6 प्रतिशत और लिवर की 6.9 प्रतिशत जरूरत ही पूरी हो सकेगी। हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट की उपलब्धता सात प्रतिशत से भी कम रहने का अनुमान है।
तमिलनाडु, दिल्ली-एनसीआर, केरलम, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्य, जो देश की करीब 29 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, में 2024 में 80 से 96 प्रतिशत प्रत्यारोपण हुए। किडनी प्रत्यारोपण में केरलम सबसे आगे रहा, इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और तमिलनाडु का स्थान रहा। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में केवल 447 (1.9 प्रति 10 लाख आबादी) और बिहार में महज 31 (0.2 प्रति 10 लाख आबादी) किडनी प्रत्यारोपण हुए। पूर्वोत्तर के कई राज्यों में एक भी किडनी प्रत्यारोपण दर्ज नहीं हुआ। लिवर, हार्ट और लंग प्रत्यारोपण की स्थिति इससे भी अधिक असंतुलित रही, जहां 85 प्रतिशत से अधिक प्रत्यारोपण सिर्फ इन्हीं पांच राज्यों में हुए। भारत में अंगदान का बड़ा हिस्सा अभी भी जीवित दाताओं पर आधारित है। देश में अंगदान की मौजूदा दर स्पेन से 70 गुना और अमेरिका से 58 गुना कम है।


















