Ayodhya News: गुरु पूर्णिमा पर उमड़ी आस्था, लगाई पुण्य की डुबकी

अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रामनगरी में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। भोर से ही श्रद्धालु की भीड़ ने पावन सरयू तट पर पहुंच कर आस्था
अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रामनगरी में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। भोर से ही श्रद्धालु की भीड़ ने पावन सरयू तट पर पहुंच कर आस्था की डुबकी लगाते हुए गुरु एवं भगवान श्रीराम का स्मरण किया। इस पूरा घाट परिसर जय सरयू मैया और जय श्रीराम के जयघोष गूंजता रहा। सुबह चार बजे से ही सरयू तट पर भक्तों के जयकारे गूंजने लगे थे। श्रद्धालुओं ने पावन सरयू में डुबकी लगाई इसके बाद अपने-अपने गुरु आश्रमों की ओर गुरु चरणों की रज शिरोधार्य करने निकल पड़े। जगह-जगह यातायात डायवर्जन के चलते श्रद्धालुओं को अपने-अपने आश्रमों में पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन उनकी आस्था नहीं डिगी। स्नान के बाद श्रद्धालु रामलला, हनुमानगढ़ी, कनक भवन समेत विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। इसके बाद शिष्य अपने-अपने गुरु आश्रमों में पहुंचकर गुरु पूजन, आशीर्वाद ग्रहण और सेवा में जुटे रहे। गुरु पूर्णिमा पर मठ-मंदिरों में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में भी दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। वहीं कनकभवन व दशरथ महल मंदिर में भी भक्तों को भीड़ दिन भर जुटी रही। इस दौरान घाटों पर पुलिस लगातार श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकती रही, जबकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया। इस दिन की महत्ता को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए थे। श्रद्धालुओं ने अपने गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए इस दिन को विशेष रूप से मनाया। गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने गुरु के चरणों में जाकर आशीर्वाद लेते हैं और उनके प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं। अयोध्या में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ भगवान श्रीराम का जन्मस्थान है। श्रद्धालुओं ने इस दिन को अपने गुरु के प्रति समर्पण और भक्ति का पर्व मानते हुए मनाया। श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि उनकी आस्था अटूट है और वे अपने गुरु के प्रति हमेशा समर्पित रहेंगे।
















