Court Takes Action: विदिशा में बच्चों की जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने का मामला

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। विदिशा जिले में स्कूली बच्चों की जान को जोखिम में डालकर स्कूल जाने का मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। ककरुआ और इमलिया गांव
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। विदिशा जिले में स्कूली बच्चों की जान को जोखिम में डालकर स्कूल जाने का मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। ककरुआ और इमलिया गांव के बच्चों ने बेतवा नदी पर बने स्टाप डैम के पिलरों पर छलांग लगाकर स्कूल जाने की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिसके बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया। यह मामला सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा हुआ है, और अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव, विदिशा कलेक्टर समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया है। बच्चों को पलोह गांव स्थित स्कूल पहुंचने के लिए बेतवा नदी पार करनी पड़ती थी, जहां नदी पर बने स्टाप डैम के पिलरों के बीच लगभग चार फीट का खाली हिस्सा था। ऐसे में बच्चे पिलरों पर संतुलन बनाते हुए एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचते थे। बारिश के मौसम में जब नदी का जलस्तर बढ़ता था, तब यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता था। इसके बावजूद बच्चों को स्कूल जाने के लिए इसी जोखिम भरे रास्ते का सहारा लेना पड़ता था।
बच्चों के स्टाप डैम के पिलरों पर छलांग लगाकर नदी पार करने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने इस मामले में सक्रियता दिखाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों की एक टीम ने मौके का निरीक्षण किया। इस टीम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन के विकल्प सीमित हैं। इस बीच, राज्य सरकार ने नजदीकी बंधेरा गांव के पूर्व माध्यमिक स्कूल का उन्नयन कर उसे हाईस्कूल बनाने का आदेश दिया। इसके फलस्वरूप, बुधवार से स्कूल में कक्षा नौवीं और दसवीं की पढ़ाई भी शुरू कर दी गई। इस निर्णय के बाद फिलहाल नौ बच्चों को बेतवा नदी के स्टाप डैम के पिलरों पर जोखिम उठाने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
















