FCRA संशोधन बिल 2026: ईसाई और मुस्लिम संगठनों का खतरा, हिंदू संगठनों की चुप्पी

fcra संशोधन बिल 2026 पर देश में सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। ईसाई और मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई संगठनों का कहना है कि यह कानून उनके स्कूल, अस्पताल और चैर
FCRA संशोधन बिल 2026 पर देश में सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। ईसाई और मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई संगठनों का कहना है कि यह कानून उनके स्कूल, अस्पताल और चैरिटी संस्थानों के लिए खतरा बन सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 6 अगस्त 2026 को ईसाई प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि यह कानून धर्म-निरपेक्ष है और किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर नहीं लाया गया है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि सरकार की किसी भी समुदाय या धर्म को परेशान करने की मंशा नहीं है। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा से मुलाकात में भी शाह ने भरोसा दिलाया कि संशोधन बिल पूर्व-प्रभाव से लागू नहीं होगा।
FCRA संशोधन विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विरोध के चलते इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। अब इसे मानसून सत्र में फिर पेश किया गया है। इस बिल का सबसे विवादित प्रावधान यह है कि अगर किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द होता है, सरेंडर किया जाता है या नवीनीकरण नहीं होता, तो विदेशी चंदे से बनी उसकी संपत्तियां एक सरकार-नियुक्त डेजिग्नेटेड अथॉरिटी के अधीन चली जाएंगी। यह अथॉरिटी उन संपत्तियों का प्रबंधन कर सकती है और तय समय में पंजीकरण बहाल न होने पर उन्हें स्थायी रूप से अपने पास रख भी सकती है। हालांकि, बिल में यह भी साफ किया गया है कि अगर संपत्ति में कोई पूजा स्थल शामिल है तो उसका धार्मिक स्वरूप बरकरार रखा जाएगा। इसके साथ ही कानून के उल्लंघन पर अधिकतम सजा भी 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी गई है।
















