Illegal auction of seized vehicle for transporting cattle: हाई कोर्ट ने यूपी सरकार को 4.75 लाख रुपये का मुआवजा देने का दिया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवंश वध निवारण अधिनियम के तहत एक वाहन की अवैध जब्ती और नीलामी के मामले में राज्य सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि बिना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवंश वध निवारण अधिनियम के तहत एक वाहन की अवैध जब्ती और नीलामी के मामले में राज्य सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि बिना कानूनी आधार के वाहन को जब्त करना और फिर उसकी नीलामी करना कानून के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार वाहन मालिक को दो लाख रुपये का मुआवजा दे।
याचिका दायर करने वाले ने आरोप लगाया था कि उसका वाहन गोवंश को वध के लिए ले जाने के आरोप में गलत तरीके से जब्त किया गया और बाद में नीलाम कर दिया गया। न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने कहा कि केवल इस आधार पर कि वाहन में गोवंश ले जाया जा रहा था, यह नहीं माना जा सकता कि उन्हें वध के लिए ले जाया जा रहा था।
अदालत ने कहा कि प्रदेश में गोवंश के परिवहन के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है और राज्य सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि गोवंश को वध के लिए राज्य से बाहर ले जाया जा रहा था। ऐसे में वाहन की जब्ती और नीलामी पूरी तरह से अवैध थी। अदालत ने प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त साक्ष्यों का पालन करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा, अदालत ने राज्य अधिकारियों को आदेश दिया कि वाहन की जब्ती की तारीख से लेकर उसकी रिहाई तक याचिकाकर्ता को 20,000 रुपये प्रति माह मुआवजा दिया जाए। मानसिक पीड़ा और वित्तीय कठिनाई के लिए 25,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी दिया गया है। अदालत ने यह राशि याचिकाकर्ता को 5 अगस्त, 2026 तक 4.75 लाख रुपये के रूप में देने का आदेश दिया है। यदि सरकार चाहे, तो यह राशि उस अधिकारी से वसूल कर सकती है जिसने कार्रवाई की थी।
















