Political Controversy in Bihar: दीपक प्रकाश का राज्यपाल कोटे से मनोनयन पर उठे सवाल

बिहार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के राज्यपाल कोटे से विधान परिषद के सदस्य मनोनीत होने पर विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 164(4) से जु
बिहार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के राज्यपाल कोटे से विधान परिषद के सदस्य मनोनीत होने पर विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 164(4) से जुड़ा है, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति मंत्री बनता है और वह विधायक या एमएलसी नहीं है, तो उसे 6 महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है। दीपक प्रकाश ने बिना किसी सदन का सदस्य बने दो बार मंत्री पद की शपथ ली है, जिसके चलते मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा और भाजपा के MLC देवेश कुमार से इस्तीफा दिलवाकर दीपक प्रकाश के लिए जगह बनाई गई। अब उन्होंने परिषद की सदस्यता ग्रहण कर ली है, लेकिन यह बहस फिर से शुरू हो गई है कि क्या राज्यपाल कोटा राजनीतिक लोगों के लिए बैकडोर एंट्री का माध्यम बन गया है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171(5) में स्पष्ट है कि राज्यपाल ऐसे व्यक्तियों को मनोनीत करेंगे, जिन्हें साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो। लेकिन हाल के वर्षों में इस कोटे का दुरुपयोग होता दिख रहा है। बिहार विधान परिषद में हाल के मनोन्यनों में से लगभग 10 सदस्य सक्रिय राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। इनमें से केवल रामवचन राय और डॉ. राज्यवर्धन आजाद को संविधान की मूल भावना के अनुरूप माना जा सकता है।















