Fraud in Jewar: व्यापारी से इलेक्ट्रॉनिक चिप खरीदने के नाम पर 4 लाख रुपये की ठगी

जेवर के खुर्जा रोड पर स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान के व्यापारी विकास पाराशर के साथ दो ठगों ने मिलकर चार लाख रुपये की ठगी की घटना को अंजाम दिया है। विकास पार
जेवर के खुर्जा रोड पर स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान के व्यापारी विकास पाराशर के साथ दो ठगों ने मिलकर चार लाख रुपये की ठगी की घटना को अंजाम दिया है। विकास पाराशर ने बताया कि 26 जून को उन्हें एक व्यक्ति ने गुड्डू कबाड़ी बताकर संपर्क किया और एक विशेष प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक चिप दिखाते हुए कहा कि वह उसे उचित दाम पर खरीद लेगा। कुछ दिनों बाद, दीपक नामक एक अन्य व्यक्ति ने उसी चिप को 400 रुपये में बेचने का दावा किया। विकास ने गुड्डू कबाड़ी को बुलाकर 500 रुपये में चिप खरीदने का सौदा किया। इस तरह से ठगी का खेल चलता रहा, लेकिन जब दीपक ने कहा कि उसके पास 1000 चिप हैं और वह नगद पैसे ले जाने का वादा किया, तब विकास ने 26 जून को एक हजार चिप खरीद ली। इसके बाद गुड्डू कबाड़ी और दीपक दोनों ने फोन उठाना बंद कर दिया। विकास ने जब अन्य कबाड़ियों से चिप के दाम पूछे, तो पता चला कि कोई भी कबाड़ी उन्हें खरीदने के लिए तैयार नहीं था। इस पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
विकास पाराशर ने अपनी शिकायत कोतवाली जेवर में दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत को दर्ज करने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कस्बा चौकी इंचार्ज से मिलकर अपनी समस्या बताई, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी शिकायत नहीं ली जाएगी। विकास ने आरोप लगाया कि उन्होंने ठगों के बारे में पुलिस को पूरी जानकारी दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। एक माह बीत जाने के बाद भी उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे वह बेहद परेशान हैं। विकास का कहना है कि पुलिस को इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।
कोतवाली निरीक्षक अजय कुमार सिंह ने कहा कि यदि व्यापारी के साथ कोई आपराधिक घटना हुई है, तो उन्हें कोतवाली आकर शिकायत देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मामले की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है, तो वे उचित कार्रवाई करेंगे। विकास पाराशर की इस ठगी की घटना ने स्थानीय व्यापारियों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। व्यापारी वर्ग में इस तरह की घटनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों से बचा जा सके। पुलिस प्रशासन को भी इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
















