Funding for Terrorism in Kashmir: घाटी में आतंक के लिए मक्का से फंडिंग, दुबई; गुलाम कश्मीर और यूके में मौजूद आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी

कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसी कश्मीर (सीआईके) ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। एजेंसी ने विदेशी टेरर फंडिंग के एक बड़े नेटवर
कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसी कश्मीर (सीआईके) ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। एजेंसी ने विदेशी टेरर फंडिंग के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें दुबई, पाकिस्तान के कब्जे वाले गुलाम कश्मीर और यूनाइटेड किंगडम में मौजूद आरोपी शामिल हैं। इन आरोपियों में मोहम्मद इकबाल नैमा उर्फ अनीस, मुख्तार अहमद बाबा और शमीमा शॉल शामिल हैं, जिन्हें टेरर फंडिंग के एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों, अलगाववादियों और आतंकियों के मददगारों को फंडिंग के लिए मक्का में 13,600 सऊदी रियाल जमा किए। यह रकम आतंकवाद के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है, जिससे घाटी में अस्थिरता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सीआईके के सूत्रों के अनुसार, यह रकम केवल 13,600 सऊदी रियाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बढ़कर 10 लाख रियाल तक भी पहुंच सकती है। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 2.53 करोड़ रुपये के बराबर होगी। इस तरह की फंडिंग से आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और यह जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता है। एजेंसी ने इस मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी कर दिए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
















