NDA और INDIA का गणित बदला: 2024 के चुनावों के बाद सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव

2024 के लोकसभा चुनावों के बाद से भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। अगस्त 2026 तक, nda ने 293 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि
2024 के लोकसभा चुनावों के बाद से भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। अगस्त 2026 तक, NDA ने 293 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि INDIA गठबंधन के दलों ने 234 सीटें जीती थीं। उस समय विपक्ष ने मजबूत चुनौती पेश की थी। लेकिन पिछले दो वर्षों में, INDIA गठबंधन के कई सहयोगी दलों में टूट हुई या वे गठबंधन से अलग हुए हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA ने पुराने सहयोगियों को फिर से साथ लाने के साथ विपक्षी खेमे में भी सेंध लगाई है।
तमिलनाडु की सत्ताधारी DMK का INDIA गठबंधन से अलग होना विपक्ष के लिए बड़ा झटका है। 2024 के लोकसभा चुनाव में DMK ने 22 सीटें जीती थीं। जून 2026 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग और रणनीतिक मतभेदों के बीच एमके स्टालिन की पार्टी ने गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। इससे INDIA गठबंधन के संसदीय गणित पर सीधा असर पड़ा, जिससे उसके खाते से 22 सांसद कम हो गए। DMK ने संसद में अपने सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की।
महाराष्ट्र में भी INDIA गठबंधन को बड़ा झटका लगा। 22 जून 2026 को शिवसेना (UBT) में बगावत हुई, जिसमें पार्टी के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इससे लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई, जिससे उद्धव ठाकरे गुट की संसदीय ताकत में कमी आई और NDA का आंकड़ा मजबूत हुआ।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की TMC के भीतर भी बड़ी फूट सामने आई। 8 जून को TMC के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने NDA सरकार को समर्थन देने का फैसला किया। बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया। NCPI पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड पार्टी है। इस पार्टी ने अपने चुनावी सफर की शुरुआत त्रिपुरा से की थी। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में NCPI ने चार उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन चारों चुनाव हार गए थे।
INDIA गठबंधन को सिर्फ लोकसभा में ही नुकसान नहीं हुआ, राज्यसभा में भी आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा। अप्रैल 2026 में पंजाब से AAP के 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए। इससे विपक्षी खेमे की उच्च सदन में ताकत प्रभावित हुई और NDA को फायदा मिला। राज्यसभा में सरकार को घेरने की विपक्ष की रणनीति के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें मिली थीं। NDA के सहयोगियों में TDP के 16, JDU के 12, शिवसेना के शिंदे गुट के 7, LJP (रामविलास) के 5 और दूसरे दलों के 13 सांसद थे। इन आंकड़ों को जोड़ने पर NDA का आंकड़ा 293 बनता है।
14 जून 2026 को TMC के काकोली घोष दस्तीदार समेत 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए, जिससे NDA का आंकड़ा 292 से बढ़कर 312 हो गया। जून में शिवसेना (UBT) के नौ में से छह सांसद भी शिंदे गुट में चले गए। अब NDA का आंकड़ा 318 हो चुका है। फिलहाल तीन लोकसभा सीटें खाली हैं। असम की नागांव, पश्चिम बंगाल की बसीरहाट और मेघालय की शिलॉन्ग। ऐसे में प्रभावी सदन 540 सदस्यों का है, जिसमें दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसद चाहिए। NDA अभी 42 वोट पीछे है।
अप्रैल 2026 में AAP के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने और जून में हुए राज्यसभा चुनावों के बाद NDA के पास 149 सांसद बताए गए। इनमें बीजेपी के 114 सांसद हैं। इसके बाद TMC के तीन राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बरैक ने 9 जुलाई को बीजेपी का दामन थाम लिया। 17 जुलाई को वे निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए, जिससे NDA की संख्या बढ़कर 152 हो गई। 16 जुलाई को TMC की सांसद कोयल मलिक ने भी इस्तीफा दिया। उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई गईं। 245 सीटों वाली राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 163 है, यानी NDA इससे 11 वोट पीछे है।
इस प्रकार, लोकसभा के 26 और राज्यसभा के 10 सांसदों को जोड़कर NDA के 36 सांसद बढ़ें हैं। बीजेपी की रणनीति सिर्फ INDIA गठबंधन को कमजोर करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि तटस्थ रुख रखने वाले दलों के भीतर भी राजनीतिक सेंधमारी देखने को मिली। 16 मार्च 2026 को ओडिशा के राज्यसभा चुनाव में नवीन पटनायक की BJD के छह विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग की, जिससे बीजेपी को फायदा मिला और राज्यसभा में उसकी स्थिति मजबूत हुई। इसके बाद BJD ने सभी छह विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया।















